'चीखती' हुई मिली 3,000 साल पुरानी ममी, आखिर किस राज के साथ दफन हुई थी महिला?
मिस्र में मिली करीब 3,000 साल पुरानी एक महिला की ममी आज भी वैज्ञानिकों के लिए रहस्य बनी हुई है। इस ममी की सबसे खास बात उसका चेहरा है। इसका मुंह काफी खुला हुआ है, जिसे देखकर ऐसा लगता है जैसे महिला चीख रही हो। इसी वजह से इसे 'स्क्रीमिंग वुमन ममी' कहा जाता है।
इस ममी की खोज 1935 में मिस्र के लक्सर इलाके में हुई थी। यह उस जगह के नीचे मिली थी, जहां प्राचीन मिस्र की महारानी हत्शेपसुत के दौर के वास्तुकार सेनमुत से जुड़ा मकबरा था। खुदाई के दौरान पुरातत्वविदों को लकड़ी के ताबूत में एक अज्ञात महिला की ममी मिली थी। हालांकि ताबूत पर ऐसा कोई शिलालेख नहीं था, जिससे महिला की पहचान की जा सके।
मुंह खुला होना बना सबसे बड़ा रहस्य
ममी की लंबाई करीब 158 सेंटीमीटर थी और शरीर काफी अच्छी तरह संरक्षित था। लेकिन उसका खुला हुआ मुंह सबसे बड़ा सवाल बना रहा। आमतौर पर प्राचीन मिस्र की ममियों में मुंह बंद दिखाई देता है। ऐसे में खुले मुंह और चेहरे की मुद्रा को देखकर पहली नजर में ऐसा लग सकता है कि महिला की मौत के समय वह दर्द या चीख की स्थिति में रही होगी। हालांकि वैज्ञानिक जांच इस बात की पुष्टि नहीं करती कि उसकी मौत किस तरह हुई थी।
2024 में हुई दोबारा वैज्ञानिक जांच
2024 में Frontiers in Medicine में प्रकाशित एक रिसर्च के तहत वैज्ञानिकों ने इस ममी की दोबारा जांच की। काहिरा यूनिवर्सिटी की ममी रेडियोलॉजिस्ट डॉ. सहर सलीम और मिस्र के पर्यटन एवं पुरावशेष मंत्रालय से जुड़ी समिया एल-मेरघानी ने CT Scan, X-ray और दूसरी वैज्ञानिक तकनीकों की मदद से ममी का अध्ययन किया।
जांच से महिला की उम्र करीब 48 साल होने का अनुमान लगाया गया। उसके दांतों में घिसावट थी और कुछ दांत गायब भी थे। रीढ़ और जोड़ों में उम्र से जुड़ी समस्याओं के संकेत भी मिले। हालांकि वैज्ञानिकों को उसकी मौत की निश्चित वजह नहीं मिली।
शरीर के अंदर मिले कई अंगों के अवशेष
CT Scan में शरीर के अंदर दिल, फेफड़े, लिवर, प्लीहा, किडनी और आंतों के अवशेष भी मिले। शोधकर्ताओं को ऐसा स्पष्ट सबूत नहीं मिला कि सामान्य ममीकरण प्रक्रिया के तहत शरीर से इन अंगों को निकालने के लिए कोई चीरा लगाया गया था।
यही बात इस ममी से जुड़े रहस्य का अहम हिस्सा है। शोधकर्ताओं ने ममीकरण में इस्तेमाल किए गए पदार्थों का भी अध्ययन किया। शरीर और बालों में इस्तेमाल किए गए पदार्थों में आयातित रेजिन मिले, जिनमें जुनिपर रेजिन और फ्रैंकिंसेंस यानी लोबान से जुड़े पदार्थ शामिल थे।
महंगे पदार्थों से हुआ ममीकरण
ममीकरण में महंगे और अच्छी गुणवत्ता वाले पदार्थों के इस्तेमाल से संकेत मिलता है कि महिला को साधारण तरीके से संरक्षित नहीं किया गया था। इसलिए यह संभावना कमजोर पड़ती है कि केवल ममीकरण में लापरवाही की वजह से उसका जबड़ा खुला रह गया होगा। हालांकि उपलब्ध सबूतों के आधार पर उसे शाही परिवार का सदस्य कहना भी सही नहीं होगा।
क्या मौत के समय खुला रह गया था मुंह?
Frontiers in Medicine में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक, खुले मुंह की एक संभावित वैज्ञानिक वजह कैडेवरिक स्पैज्म हो सकती है। यह एक दुर्लभ स्थिति है, जिसमें मौत के आसपास कुछ मांसपेशियां अचानक सिकुड़कर उसी स्थिति में स्थिर हो सकती हैं।
शोधकर्ताओं का अनुमान है कि अगर महिला की मौत अचानक हुई हो, तो उसके चेहरे और जबड़े की स्थिति उसी समय स्थिर हो गई हो सकती है। इससे उसका मुंह खुला रह गया होगा। हालांकि यह अंतिम निष्कर्ष नहीं है। वैज्ञानिकों ने यह साबित नहीं किया है कि महिला की मौत इसी प्रक्रिया की वजह से हुई थी या वह वास्तव में चीखते हुए मरी थी।
बालों में मिली खास चीज
ममी के सिर पर एक जटिल विग भी मिली थी। शोधकर्ताओं के मुताबिक, इसे खजूर के पेड़ से मिलने वाले रेशों से तैयार किया गया था। महिला के बालों में मेहंदी के संकेत भी मिले हैं। ममी पर इस्तेमाल किए गए पदार्थों से यह भी पता चलता है कि प्राचीन मिस्र में शवों को सुरक्षित रखने के लिए प्राकृतिक और आयातित दोनों तरह की सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाता था।
दफनाने की मुद्रा भी थी अलग
इस महिला की दफन मुद्रा भी कुछ शाही ममियों से अलग थी। उसके हाथ सीने पर क्रॉस किए हुए नहीं थे। साथ ही, ममी पर मिले महंगे पदार्थों के बावजूद उसके शाही परिवार से संबंध का कोई निर्णायक प्रमाण नहीं मिला है।
3,000 साल बाद भी रहस्य बाकी
नई वैज्ञानिक जांच ने इस ममी के बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने जरूर रखी हैं, लेकिन उसकी मौत का रहस्य पूरी तरह नहीं सुलझ पाया है। CT Scan से मौत की कोई निश्चित वजह नहीं मिली। खुले मुंह के लिए कैडेवरिक स्पैज्म एक संभावित वैज्ञानिक व्याख्या है, लेकिन इसे प्रमाणित अंतिम निष्कर्ष नहीं माना गया है।
1935 में खोजे जाने के दशकों बाद भी यह अनाम महिला अपनी खुली हुई चेहरे की मुद्रा की वजह से लोगों की जिज्ञासा बढ़ाती है। करीब 3,000 साल बाद भी यह ममी प्राचीन मिस्र में मृत्यु और ममीकरण की प्रक्रियाओं को समझने के लिए वैज्ञानिकों के अध्ययन का विषय बनी हुई है।