27-28 अगस्त की रात आसमान में दिखेगा ‘ब्लड मून’, 96% तक लाल हो जाएगा चांद

27-28 अगस्त की रात आसमान में दिखेगा ‘ब्लड मून’, 96% तक लाल हो जाएगा चांद

📅 August 19, 2026 🏷️ News/Science & Technology ✍️ NewsTime Editorial
27 और 28 अगस्त की रात आसमान में एक बेहद खूबसूरत खगोलीय घटना देखने को मिलेगी। इस दौरान चंद्रमा पृथ्वी की गहरी छाया से होकर गुजरेगा और अपने अधिकतम चरण में चंद्रमा का करीब 96 फीसदी हिस्सा पृथ्वी की सबसे गहरी छाया यानी उमब्र (Umbra) में पहुंच जाएगा। इसी वजह से चांद का बड़ा हिस्सा लाल या नारंगी रंग का दिखाई दे सकता है, जिसे आम तौर पर ‘ब्लड मून’ कहा जाता है। हालांकि वैज्ञानिक रूप से यह पूर्ण चंद्र ग्रहण नहीं, बल्कि डीप पार्टियल लूनर इक्लिप्स यानी गहरा आंशिक चंद्र ग्रहण होगा, क्योंकि चंद्रमा का एक छोटा हिस्सा पृथ्वी की गहरी छाया से बाहर रहेगा।

यह चंद्र ग्रहण 27 अगस्त की रात शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह तक जारी रहेगा। अमेरिका के उदाहरण के मुताबिक, ग्रहण की शुरुआती पेनुम्ब्रल अवस्था रात करीब 9:23 बजे शुरू होगी, जबकि आंशिक ग्रहण लगभग 10:33 बजे शुरू होगा। ग्रहण अपने चरम पर करीब 12:12 बजे पहुंचेगा, जब लगभग 96.2 फीसदी चंद्रमा पृथ्वी की उमब्र छाया में होगा। इसके बाद आंशिक ग्रहण करीब 1:51 बजे खत्म होगा और अंतिम पेनुम्ब्रल चरण लगभग 3:01 बजे समाप्त होगा। पूरी खगोलीय घटना करीब 5 घंटे 38 मिनट तक चल सकती है। हालांकि अलग-अलग देशों और शहरों में इसका समय अलग हो सकता है।

ग्रहण की दृश्यता इस बात पर निर्भर करेगी कि उस समय आपके इलाके में चंद्रमा आसमान में दिखाई दे रहा है या नहीं। उत्तरी अमेरिका के बड़े हिस्से, जिसमें अमेरिका के कई क्षेत्र शामिल हैं, इस घटना को देखने के लिए बेहतर स्थिति में रहेंगे। दुनिया के दूसरे हिस्सों में लोग ग्रहण का केवल कुछ चरण ही देख सकते हैं। इसके अलावा मौसम भी अहम भूमिका निभाएगा। अगर आसमान में बादल रहे तो अच्छी लोकेशन होने के बावजूद ग्रहण देखना मुश्किल हो सकता है।

अब सवाल है कि आखिर चंद्रमा लाल क्यों हो जाता है? जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, तो पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। इस दौरान सूर्य की कुछ रोशनी पृथ्वी के वायुमंडल से होकर चंद्रमा तक पहुंचती है। पृथ्वी का वातावरण नीली रोशनी जैसी छोटी तरंगों को ज्यादा बिखेर देता है, जबकि लाल और नारंगी रंग की लंबी तरंगें वातावरण से होकर आगे निकल जाती हैं। यही रोशनी चंद्रमा की सतह तक पहुंचकर उसे लाल, नारंगी या तांबे जैसे रंग में चमका सकती है। इसका प्रभाव कुछ हद तक सूर्योदय और सूर्यास्त के समय दिखाई देने वाले लाल-नारंगी आसमान जैसा होता है।

इस चंद्र ग्रहण को देखने के लिए किसी खास चश्मे या आंखों की सुरक्षा की जरूरत नहीं है। सौर ग्रहण के विपरीत, चंद्र ग्रहण को नंगी आंखों से सुरक्षित तरीके से देखा जा सकता है। अगर आपके पास दूरबीन या टेलीस्कोप है तो चंद्रमा के बदलते रंग और पृथ्वी की छाया को उसकी सतह पर आगे बढ़ते हुए और बेहतर तरीके से देखा जा सकता है, लेकिन इसके लिए किसी विशेष उपकरण की जरूरत नहीं है।

यह घटना अगस्त की पूर्णिमा के साथ भी होगी। अगस्त की इस पूर्णिमा को पारंपरिक रूप से ‘स्टर्जन मून’ कहा जाता है। इसका नाम उत्तरी अमेरिका की ग्रेट लेक्स और लेक चैंपलेन में गर्मियों के अंतिम दौर में बड़ी संख्या में पाए जाने वाली स्टर्जन मछली से जुड़ा है। यानी 27-28 अगस्त की रात आसमान में एक तरफ चमकता पूर्ण चंद्रमा होगा और दूसरी तरफ पृथ्वी की छाया उसे धीरे-धीरे लाल रंग में बदलती नजर आ सकती है—एक ऐसा नजारा जिसे आसमान देखने वाले लोग बिल्कुल मिस नहीं करना चाहेंगे।

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