30,000 फीट की ऊंचाई पर जिंदगी और मौत के बीच लड़ाई, घायल होने के बाद भी नहीं मानी हार... कौन हैं पायलट स्मित मच्छार?
30 सितंबर 2026 को फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में कुछ ऐसा ही हुआ। दुबई से तेल अवीव जा रहे बोइंग 737 MAX विमान में कॉकपिट के अंदर भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर उनके सह-पायलट ने कथित तौर पर हमला कर दिया। घटना के दौरान मच्छार गंभीर रूप से घायल हुए, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उनके साहस और तुरंत लिए गए फैसलों को विमान में सवार लोगों की जान बचाने में अहम माना जा रहा है।
कॉकपिट के अंदर अचानक मच गया हड़कंप
फ्लाइट FZ1073 दुबई से तेल अवीव के लिए रवाना हुई थी। विमान में करीब 170 से अधिक लोग सवार थे। उड़ान के दौरान कॉकपिट में कैप्टन स्मित मच्छार और उनके सह-पायलट के बीच गंभीर घटना हुई।
रिपोर्टों के मुताबिक, सह-पायलट ने मच्छार पर हमला किया और वह गंभीर रूप से घायल हो गए। इसी दौरान विमान की ऊंचाई में भी तेजी से बदलाव आया। कुछ रिपोर्टों के अनुसार विमान कुछ ही समय में हजारों फीट नीचे आ गया, जिससे स्थिति बेहद गंभीर हो गई।
लेकिन सबसे मुश्किल स्थिति अभी बाकी थी।
घायल थे, खून बह रहा था... फिर भी उठे
हमले में घायल होने के बाद मच्छार कुछ समय के लिए गिर गए थे। लेकिन उन्हें एहसास हुआ कि अगर उन्होंने दोबारा कॉकपिट संभालने की कोशिश नहीं की तो विमान में मौजूद यात्रियों की जिंदगी खतरे में पड़ सकती थी।
बाद में अपने अनुभव के बारे में उन्होंने बताया कि उन्हें समझ आ गया था कि अगर वह दोबारा उठकर काम नहीं करते तो यात्रियों की जान खतरे में पड़ सकती थी। इसी सोच के साथ उन्होंने अपनी बची हुई ताकत जुटाई और कॉकपिट का दरवाजा खोलने की कोशिश की।
यही फैसला आगे चलकर बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ।
यात्रियों ने भी दिखाई हिम्मत
कॉकपिट का रास्ता खुलने के बाद विमान में मौजूद यात्रियों और क्रू के कुछ सदस्यों ने अंदर पहुंचकर हमलावर को काबू करने में मदद की। एक ऑफ-ड्यूटी पायलट ने भी विमान को स्थिर करने में मदद की। इस पूरे घटनाक्रम के बीच विमान को सुरक्षित तरीके से उतारना सबसे बड़ी चुनौती थी।
आखिरकार विमान को सऊदी अरब के ताबुक में आपात स्थिति में उतारा गया। यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और घायल कैप्टन स्मित मच्छार को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।
कौन हैं कैप्टन स्मित मच्छार?
स्मित मच्छार मुंबई के घाटकोपर इलाके से बताए जाते हैं और भारतीय एविएशन सेक्टर में उनका लंबा अनुभव है। उन्होंने शुरुआत में विमानन क्षेत्र में जाने से पहले टेक्सटाइल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। इसके बाद पायलट बनने की ट्रेनिंग के लिए न्यूजीलैंड गए।
मच्छार ने करीब 11 साल स्पाइसजेट के साथ काम किया। इस दौरान वह सिर्फ विमान उड़ाने तक सीमित नहीं रहे, बल्कि दूसरे पायलटों की ट्रेनिंग से भी जुड़े रहे। नवंबर 2020 से जून 2022 तक वह लाइन ट्रेनिंग कैप्टन की भूमिका में भी रहे।
इसके बाद जून 2022 में वह फ्लाईदुबई से जुड़े और बोइंग 737 के कैप्टन बने। उपलब्ध प्रोफाइल संबंधी रिपोर्टों में उनके पास हजारों घंटे की उड़ान का अनुभव बताया गया है।
17 साल का अनुभव बना सबसे बड़ा हथियार
इस घटना के बाद सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हुई कि इतनी भयावह परिस्थिति में मच्छार ने खुद को संभाला कैसे?
मच्छार के मुताबिक, विमानन क्षेत्र में करीब 17 साल के अनुभव ने उन्हें बेहद मुश्किल समय में निर्णय लेने में मदद की। पायलट के लिए ट्रेनिंग सिर्फ विमान उड़ाने तक सीमित नहीं होती। उसे अचानक पैदा होने वाली आपात परिस्थितियों में तेजी से फैसला लेना पड़ता है।
लेकिन इस बार चुनौती सिर्फ तकनीकी नहीं थी। उन्हें खुद गंभीर चोट लगी थी और उसी समय विमान में मौजूद यात्रियों की जिंदगी भी दांव पर थी।
प्रधानमंत्री मोदी से हुई बातचीत
घटना के बाद कैप्टन मच्छार का नाम भारत और दुनिया में चर्चा का विषय बन गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनसे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात की और उनके अनुभव सुने। मच्छार ने इस दौरान घटना के बारे में जानकारी साझा की।
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी मच्छार की बहादुरी की सार्वजनिक रूप से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि घायल होने के बावजूद भारतीय पायलट ने मुकाबला किया और कॉकपिट का रास्ता खुलवाने में मदद की, जिससे यात्रियों और क्रू को हमलावर पर काबू पाने का मौका मिला।
एक करोड़ रुपये का सम्मान
कैप्टन मच्छार की बहादुरी को देखते हुए फार्मा कंपनी मैनकाइंड फार्मा ने उन्हें और उनके परिवार को 1 करोड़ रुपये की सम्मान राशि देने की घोषणा की। कंपनी ने उनके साहस और जिम्मेदारी की भावना को इस सम्मान की वजह बताया।
इसके अलावा फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स ने भी प्रधानमंत्री कार्यालय से मच्छार के लिए उचित राष्ट्रीय सम्मान या वीरता पुरस्कार पर विचार करने का अनुरोध किया है।
हीरो इसलिए नहीं कि उन्होंने डर महसूस नहीं किया...
स्मित मच्छार की कहानी इसलिए खास नहीं है कि उन्होंने किसी खतरे को महसूस ही नहीं किया। असली बात यह है कि गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी उन्होंने अपनी जिम्मेदारी को खुद से ऊपर रखा।
एक पायलट की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है—विमान में बैठे लोगों को सुरक्षित उनकी मंजिल तक पहुंचाना। उस दिन यह जिम्मेदारी सामान्य से कहीं ज्यादा कठिन हो गई थी।
कॉकपिट में हमला, शरीर से बहता खून, तेजी से बदलती विमान की स्थिति और सामने सैकड़ों यात्रियों की जिंदगी...
ऐसे समय में मच्छार ने जो फैसला लिया, वही आज उनकी पहचान बन गया है।
कभी-कभी हीरो बनने के लिए कोई सुपरपावर नहीं चाहिए होती। सिर्फ सही समय पर हार न मानने का साहस चाहिए। कैप्टन स्मित मच्छार की कहानी इसी साहस की कहानी है।