बच्चों के नाम कुत्ता, सूअर और पत्थर! चीन में अजीब नाम रखने के पीछे थी खास मान्यता

बच्चों के नाम कुत्ता, सूअर और पत्थर! चीन में अजीब नाम रखने के पीछे थी खास मान्यता

📅 October 17, 2026 🏷️ World/History ✍️ NewsTime Editorial
बच्चे के जन्म के बाद माता-पिता उसके लिए ऐसा नाम चुनना चाहते हैं, जो सुनने में अच्छा हो और जिसका कोई खास अर्थ भी हो। लेकिन प्राचीन चीन में कुछ परिवार बच्चों के नाम कुत्ता, सूअर, पत्थर और लोहे जैसी चीजों पर रखते थे। सुनने में यह भले ही अजीब लगे, लेकिन इसके पीछे बच्चों को बुरी किस्मत और बुरी आत्माओं से बचाने की पारंपरिक मान्यता जुड़ी थी।

बुरी आत्माओं से बचाने के लिए रखते थे साधारण नाम

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, पुराने चीन में बच्चों को कम उम्र में बीमार पड़ने और उनकी मृत्यु होने का डर रहता था। उस समय चिकित्सा सुविधाएं आज जैसी विकसित नहीं थीं। ऐसे में कुछ माता-पिता मानते थे कि यदि बच्चे का नाम साधारण या कम आकर्षक रखा जाए, तो बुरी आत्माएं उस पर ध्यान नहीं देंगी। उन्हें उम्मीद थी कि इससे बच्चा बुरी नजर और अनहोनी से बचा रहेगा। हालांकि, यह एक पारंपरिक मान्यता थी, इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

कुत्ता, सूअर और पत्थर जैसे नाम क्यों?

पुराने चीन में कुछ परिवार बच्चों को कुत्ता या सूअर जैसे नामों से बुलाते थे। इसके अलावा पत्थर, लोहे के खंभे और हथौड़े जैसी चीजों से जुड़े नाम भी इस्तेमाल किए जाते थे। इन नामों के पीछे अलग-अलग मान्यताएं थीं। कुछ माता-पिता चाहते थे कि उनका बच्चा पत्थर या लोहे की तरह मजबूत बने और बीमारी तथा जीवन की मुश्किलों का सामना कर सके।

रिपोर्ट में गौ शेंग और झू वा जैसे नामों का उल्लेख किया गया है। इनके अर्थ क्रमशः कुत्ते का बचा हुआ खाना और सूअर का बच्चा बताए गए हैं। आज के नजरिए से ऐसे नाम असामान्य लग सकते हैं, लेकिन उस समय कुछ परिवार इन्हें बच्चे की सुरक्षा से जोड़कर देखते थे।

प्राचीन चीन के कुछ मशहूर लोगों के भी ऐसे उपनाम

रिपोर्ट के मुताबिक, इस तरह के नाम केवल आम परिवारों तक सीमित नहीं थे। प्राचीन चीन के कुछ प्रसिद्ध लोगों के उपनाम भी जानवरों से जुड़े बताए जाते हैं। पश्चिमी हान राजवंश के सम्राट वू के उपनाम के रूप में झी का उल्लेख मिलता है, जिसका संबंध सूअर से बताया गया है। वहीं, लेखक और राजनयिक सिमा शियांग्रू के नाम के साथ क्वान जि का उल्लेख किया जाता है, जिसका संबंध कुत्ते से बताया गया है।

इन उदाहरणों से पता चलता है कि पुराने चीन में नामों और उपनामों के अर्थ आज की तुलना में अलग सांस्कृतिक संदर्भ रख सकते थे। हालांकि, ऐतिहासिक नामों के अनुवाद और उनके अर्थ को समझते समय संबंधित स्रोतों और उस दौर की भाषा का संदर्भ ध्यान में रखना जरूरी है।

आज भी कुछ जगहों पर मिलते हैं ऐसे नाम

समय के साथ चिकित्सा सुविधाओं में सुधार हुआ और समाज की सोच भी बदली। इसलिए बच्चों को कुत्ता या सूअर जैसे नाम देने की परंपरा पहले के मुकाबले कम हो गई है। हालांकि, कुछ ग्रामीण इलाकों में पारंपरिक या बचपन के नाम अब भी सुनने को मिल सकते हैं।

रिपोर्ट में चीन के शान्शी प्रांत की एक महिला का उदाहरण भी दिया गया है, जिसका बचपन का नाम गौ दान था। बताया गया कि बचपन में गंभीर रूप से बीमार पड़ने के बाद उसके माता-पिता ने उसे इस नाम से बुलाना शुरू किया था। उनकी उम्मीद थी कि ऐसा नाम रखने से उनकी बेटी सुरक्षित रहेगी। जब उसकी मां विश्वविद्यालय में उससे मिलने पहुंचीं और सबके सामने इसी नाम से पुकारा, तो उसके साथ पढ़ने वाले लोग हंसने लगे।

अजीब नामों के पीछे छिपी थी बच्चों की सुरक्षा की उम्मीद

आज कुत्ता, सूअर या पत्थर जैसे नाम सुनकर लोगों को हैरानी हो सकती है। लेकिन पुराने चीन में कुछ परिवारों के लिए ये नाम बच्चों को सुरक्षित और स्वस्थ रखने की उम्मीद से जुड़े थे। यह परंपरा उस समय की सांस्कृतिक मान्यताओं और अंधविश्वासों को दर्शाती है। इन मान्यताओं का वैज्ञानिक आधार नहीं है, लेकिन इनके पीछे माता-पिता की अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जरूर दिखाई देती है।

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