न बिजली, न पानी, न फोन... 62 साल पहले जंगल के बीच 12×12 फीट के केबिन में क्यों रहने लगी थीं ‘ऐनी’
1964 का वो साल
ऐनी ला बैस्टिल ने 1964 में ट्विचेल झील के पास 12×12 फीट का एक छोटा केबिन बनाया था. इसमें आधुनिक घरों जैसी कोई सुविधा नहीं थी. ऐनी लेखक, संरक्षणवादी, वाइल्डलाइफ इकोलॉजिस्ट और एजुकेटर भी थीं. उन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा न्यूयॉर्क के एडिरोंडैक वन्य क्षेत्र में बिताया. उनकी मृत्यु के बाद उनका केबिन न्यूयॉर्क स्टेट को दे दिया गया, ताकि इस जगह के प्राकृतिक और ऐतिहासिक महत्व को संरक्षित किया जा सके.
मजे-मस्ती के लिए नहीं था केबिन
यह केबिन उन्होंने वीकेंड पर छुट्टियां मनाने या मजे-मस्ती के लिए नहीं बनाया था. ऐनी ने इसे अपने जीवन का हिस्सा बना लिया था. जिस जगह पर यह केबिन बना था, वहां तक सड़क नहीं जाती थी. बिजली और फोन की लाइन भी नहीं थी. खाना पकाने के लिए पारंपरिक तरीकों का सहारा लेना पड़ता था. यानी रोजमर्रा की जिंदगी पूरी तरह प्रकृति और उपलब्ध संसाधनों पर निर्भर थी.
पेड़ नहीं काटने पड़े
ऐनी ने इस जगह को इसलिए चुना था क्योंकि यहां केबिन बनाने के लिए उन्हें किसी पेड़ को काटने की जरूरत नहीं पड़ी. घर बनाने के लिए उन्होंने स्थानीय लकड़ी के गोदाम से लट्ठे लिए थे. जंगल के बीच इस तरह रहना एक तरफ बेहद सुकून भरा था, तो दूसरी तरफ चुनौतीपूर्ण और खतरनाक भी हो सकता था. खासकर सर्दियों में यहां रहना काफी मुश्किल हो जाता था. कई बार झील तक जम जाती थी, लेकिन ऐनी ने अपना केबिन नहीं छोड़ा.
प्रकृति और संरक्षण से गहरा रिश्ता
ऐनी ने एडिरोंडैक वन्य क्षेत्र के संरक्षण के लिए लंबे समय तक काम किया. उन्होंने प्रकृति और वन्यजीवों को करीब से समझा और अपने अनुभवों को लोगों तक पहुंचाया. कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करने वाली ऐनी ने अपने जीवन में जंगल, वन्यजीव संरक्षण और शिक्षा को खास महत्व दिया.
किताब में लिखे जंगल के अनुभव
बाद में ऐनी ने जंगल में बिताए अपने अनुभवों को Woodswoman नाम की किताब में दर्ज किया. इसमें उन्होंने बिना आधुनिक सुविधाओं के रहने, नाव से सफर करने, अकेले लकड़ी काटने और कड़ाके की सर्दी का सामना करने जैसी कई बातें साझा कीं. उनके लिए वह छोटा सा केबिन सिर्फ रहने की जगह नहीं था, बल्कि प्रकृति के साथ उनके गहरे रिश्ते का प्रतीक बन गया था.
2011 में हुई मृत्यु
ऐनी ला बैस्टिल की मृत्यु 2011 में 75 साल की उम्र में हुई थी. हालांकि, उनकी मृत्यु के बाद भी एडिरोंडैक जंगल और उनके केबिन से उनका रिश्ता खत्म नहीं हुआ. 2016 में उनका केबिन दान कर दिया गया, ताकि इस क्षेत्र के इकोलॉजिकल और हिस्टोरिकल कैरेक्टर को बनाए रखा जा सके. उनके नाम पर ऐनी ला बैस्टिल मेमोरियल राइटर्स रेजीडेंसी भी आयोजित की जाती है, जहां लेखकों को प्रकृति और लेखन से जुड़ने का अवसर मिलता है.
आज ऐनी ला बैस्टिल की कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो आधुनिक जीवन की भागदौड़ और सुविधाओं से दूर प्रकृति के बीच जीवन को समझना चाहते हैं. 12×12 फीट का उनका छोटा सा केबिन इस बात की मिसाल बन गया कि सीमित संसाधनों के बावजूद इंसान प्रकृति के साथ गहरा रिश्ता बना सकता है.