नदी साफ करते-करते विदेश से मिला जॉब ऑफर
अजनार नदी में जमा प्लास्टिक, बोतलों और दूसरे कचरे को देखकर सुरेंद्र ने इसे साफ करने का फैसला किया. उन्होंने किसी बड़ी टीम या सरकारी अभियान का इंतजार नहीं किया, बल्कि खुद ही सफाई का सामान जुटाया और नदी में उतर गए. कई दिनों और महीनों तक वह नदी से कचरा निकालते रहे और अपनी मुहिम को लगातार जारी रखा.
सुरेंद्र के इस काम को देखकर कई लोग हैरान हुए. कुछ लोगों ने उनका मजाक भी उड़ाया, लेकिन उन्होंने अपने काम से पीछे हटने के बजाय सफाई अभियान जारी रखा. उन्होंने नदी की सफाई करते हुए कई वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किए. इन वीडियो में सफाई से पहले और सफाई के बाद नदी की तस्वीरें भी दिखाई गईं, जिनमें बड़ा अंतर नजर आया.
वीडियो वायरल होने के बाद बड़ी संख्या में लोग सुरेंद्र की तारीफ करने लगे. लोगों का कहना था कि जहां कई लोग नदियों में कचरा फेंककर सफाई की जिम्मेदारी दूसरों पर छोड़ देते हैं, वहीं इस युवक ने खुद आगे बढ़कर बदलाव की शुरुआत की.
विदेश तक पहुंची ‘बिट्टू तबाही’ की कहानी
सुरेंद्र की मेहनत की चर्चा सोशल मीडिया के जरिए विदेशों तक पहुंच गई. उनकी नदी सफाई की कहानी नीदरलैंड की संस्था द ओशियन क्लीनअप के संस्थापक और सीईओ बॉयन स्लैट तक भी पहुंची. यह संस्था समुद्रों और नदियों से प्लास्टिक प्रदूषण हटाने के लिए काम करती है.
सुरेंद्र की मेहनत का वीडियो देखने के बाद बॉयन स्लैट ने सोशल मीडिया पर उन्हें अपने साथ काम करने का ऑफर दिया. उन्होंने ‘Come work for us’ लिखकर सुरेंद्र को संस्था के साथ काम करने का न्योता दिया. इस ऑफर के बाद सुरेंद्र की कहानी और तेजी से वायरल हो गई.
‘पहले और बाद’ की तस्वीरों ने चौंकाया
बिट्टू ने सोशल मीडिया पर नदी की सफाई से पहले और सफाई के बाद की तस्वीरें शेयर कीं. दोनों तस्वीरों में अंतर देखकर लोग हैरान रह गए. जिस जगह पहले कचरा और गंदगी दिखाई दे रही थी, वहां सफाई के बाद काफी बदलाव नजर आया.
इन तस्वीरों ने सोशल मीडिया यूजर्स का ध्यान अपनी ओर खींचा. कई लोगों ने सुरेंद्र की मेहनत की तारीफ करते हुए कहा कि अगर एक व्यक्ति अपने स्तर पर इतना बड़ा बदलाव ला सकता है, तो सामूहिक प्रयास से नदियों और सार्वजनिक स्थानों की स्थिति में और भी बड़ा सुधार किया जा सकता है.
सोशल मीडिया पर उठे सवाल
बिट्टू की तारीफ के साथ-साथ सोशल मीडिया पर एक बड़ा सवाल भी उठ रहा है. लोगों का कहना है कि आखिर एक सार्वजनिक नदी की सफाई के लिए 20 साल के युवक को अकेले क्यों उतरना पड़ा? कई यूजर्स ने स्थानीय प्रशासन और नगर निकाय की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाए.
लोगों का कहना है कि नदियों और सार्वजनिक जगहों की नियमित सफाई की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि वहां कचरा जमा ही न हो. सुरेंद्र की कहानी सिर्फ नदी की सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि बदलाव की शुरुआत एक व्यक्ति भी कर सकता है.
बिजनेसमैन आनंद महिंद्रा भी पहले सुरेंद्र के प्रयासों की सोशल मीडिया पर सराहना कर चुके हैं. उनके काम को लेकर लोगों के बीच लगातार सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली.
मेहनत का मिला बड़ा इनाम
विदेश से मिले इस ऑफर के बाद सोशल मीडिया पर सुरेंद्र की चर्चा और बढ़ गई है. लोग इसे उनकी मेहनत का बड़ा इनाम बता रहे हैं. जिस युवक ने बिना किसी बड़ी टीम के नदी की सफाई शुरू की थी, अब उसे पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने वाली एक अंतरराष्ट्रीय संस्था के साथ काम करने का मौका मिल सकता है.
सुरेंद्र की कहानी यह भी दिखाती है कि किसी बदलाव के लिए हमेशा बड़ी टीम या बहुत ज्यादा पैसे की जरूरत नहीं होती. अगर इरादा मजबूत हो तो एक इंसान भी बदलाव की शुरुआत कर सकता है. अजनार नदी से शुरू हुई सुरेंद्र की यह मुहिम अब सोशल मीडिया के जरिए दुनिया के दूसरे हिस्सों तक पहुंच गई है.
सबसे खास बात यह है कि जिस काम के लिए सुरेंद्र ने किसी इनाम की मांग नहीं की, उसी काम ने उनके लिए एक बड़ा करियर का रास्ता खोल दिया है. उनकी कहानी युवाओं को पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी के लिए आगे आने की प्रेरणा देती है.