चीन ने दक्षिण चीन सागर के विवादित पैरासेल द्वीपसमूह में एंटीलोप रीफ पर विशाल मैन मेड आइलैंड बनाने का पहला चरण पूरा कर लिया है। सैटेलाइट तस्वीरों के मुताबिक करीब छह महीने से ज्यादा समय तक चले ड्रेजिंग और भूमि निर्माण के बाद लगभग छह किलोमीटर लंबा नया द्वीप तैयार हो चुका है। निर्माण कार्य के दौरान इस्तेमाल किए गए जहाज और मशीनें अब वहां से हट चुकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह द्वीप भविष्य में चीन की एक बड़ी सैन्य चौकी का आधार बन सकता है। नए द्वीप पर करीब तीन किलोमीटर लंबी सीधी तटीय पट्टी दिखाई दे रही है, जिसे संभावित विमान रनवे के तौर पर देखा जा रहा है। इसके अलावा करीब 680 मीटर लंबा घाट भी बनाया गया है, जो गहरे पानी वाले इलाके से जुड़ा है। यहां चीनी कोस्ट गार्ड का जहाज भी देखा गया है। द्वीप के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में इमारतों का निर्माण शुरू हो चुका है और वहां हेलीपैड भी दिखाई दे रहा है। सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज यानी CSIS की रिपोर्ट के मुताबिक संभावित रनवे के लिए खुदाई का काम भी शुरू हो चुका है। आकार के लिहाज से यह नया निर्माण पड़ोसी वुडी द्वीप से काफी बड़ा बताया जा रहा है, जो इस समय चीन का प्रशासनिक केंद्र है। विशेषज्ञों के अनुसार एंटीलोप रीफ की रणनीतिक स्थिति इसे चीन के लिए बेहद महत्वपूर्ण बनाती है। यह दक्षिण चीन सागर के उत्तरी हिस्से में स्थित है, जिसे ताइवान से जुड़े किसी संभावित संघर्ष की स्थिति में अहम माना जाता है। पूरा बेस तैयार होने के बाद यहां चीन अपने रणनीतिक विमानों, लंबी दूरी की निगरानी प्रणालियों और अन्य सैन्य क्षमताओं को तैनात कर सकता है। विश्लेषकों का यह भी मानना है कि भविष्य में यहां मिसाइल सिस्टम, रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और निगरानी सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं। इससे चीन को मुख्य भूमि से दूर दक्षिण चीन सागर में अपनी नौसेना और वायुसेना की गतिविधियां बढ़ाने में मदद मिल सकती है। चीन 1974 से पैरासेल द्वीपसमूह पर नियंत्रण रखता है, लेकिन वियतनाम पूरे द्वीपसमूह पर अपनी संप्रभुता का दावा करता है। वियतनाम ने एंटीलोप रीफ पर चीन के निर्माण कार्य का विरोध भी किया है। दूसरी ओर चीन के रक्षा मंत्रालय ने नए द्वीप पर सीधे कोई टिप्पणी नहीं की है और सरकारी मीडिया ने इस तरह के निर्माण को नागरिक वैज्ञानिक अनुसंधान और मौसम पूर्वानुमान जैसी गतिविधियों से जोड़ा है। हालांकि रक्षा विशेषज्ञ इसे चीन की सैन्य क्षमता और क्षेत्रीय पहुंच बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं। दक्षिण चीन सागर पहले से ही चीन, अमेरिका और कई दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के बीच रणनीतिक तनाव का प्रमुख केंद्र है। चीन इससे पहले भी स्प्रैटली द्वीपसमूह में कई कृत्रिम द्वीप बनाकर वहां सैन्य सुविधाएं विकसित कर चुका है। एंटीलोप रीफ पर करीब एक दशक के अंतराल के बाद इस तरह का बड़ा निर्माण फिर से शुरू होना क्षेत्र में सैन्यीकरण बढ़ने का संकेत माना जा रहा है। यदि यह पूरा बेस सैन्य रूप से विकसित किया जाता है, तो इससे अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए दक्षिण चीन सागर में सैन्य गतिविधियों की योजना बनाना और संचालन करना अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।