तिब्बत में तबाही के फुटेज गायब
ग्यिरोंग चीन और नेपाल के बीच एक महत्वपूर्ण सीमा मार्ग है। इसी इलाके से बाढ़ की तबाही का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया था। वीडियो में पहाड़ से मिट्टी, पत्थर और पानी का तेज बहाव सीमा क्षेत्र की तरफ आता दिखाई दे रहा था।
वीडियो हटाए जाने के दावे
द न्यूयॉर्क टाइम्स की 27 अगस्त की रिपोर्ट के मुताबिक, यह वीडियो चीनी सोशल मीडिया पर कुछ समय तक मौजूद रहा और बाद में उसे हटा दिया गया। इस रिपोर्ट के बाद चीन में प्राकृतिक आपदा से जुड़ी जानकारी कितनी स्वतंत्र रूप से सामने आ रही है, इसे लेकर सवाल उठने लगे।
ग्यिरोंग में आपदा का असर कितना बड़ा था, इसकी पूरी तस्वीर अभी स्पष्ट नहीं है। चीन के अधिकारियों ने गुरुवार सुबह तक ग्यिरोंग में 558 लोगों के लापता होने की बात कही थी। उस समय तीन मौतों की पुष्टि की गई थी।
सरकारी मीडिया ने रेस्क्यू अभियान पर दिया जोर
स्थानीय लोगों की ओर से सामने आई तस्वीरों और वीडियो की जगह चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने राहत और बचाव अभियान पर ज्यादा ध्यान दिया। रिपोर्ट में बताया गया कि प्रभावित इलाके में सैकड़ों बचावकर्मियों को भेजा गया है। इनमें सैन्यकर्मी, आपातकालीन दल, हेलिकॉप्टर और अन्य राहत उपकरण शामिल थे।
चीन के सरकारी अखबार पीपुल्स डेली ने भी बचाव अभियान से जुड़ी खबरों को प्रमुखता दी। रिपोर्ट में राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अधिकारियों को प्रभावित लोगों को बचाने के लिए हर संभव प्रयास करने के निर्देश का उल्लेख किया गया।
यही अंतर अब चर्चा का विषय बना हुआ है। नेपाल में पत्रकारों और स्थानीय लोगों की तस्वीरें और वीडियो लगातार सामने आ रहे थे, जबकि चीन की तरफ से आपदा से जुड़ी ज्यादातर जानकारी सरकारी मीडिया के माध्यम से सामने आई।
विशेषज्ञों ने भी उठाए सवाल
इंटेलिजेंस एक्सपर्ट और जियोपॉलिटिकल एनालिस्ट आदिल बरार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दावा किया कि चीन की तरफ से आपदा की कुछ तस्वीरें थोड़ी देर ऑनलाइन रहीं और बाद में हटा दी गईं। उनका कहना था कि नेपाल की तरफ से सामने आए वीडियो बड़े स्तर पर उपलब्ध रहे, जबकि तिब्बत की तरफ के कुछ वीडियो गायब हो गए।
रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ ब्रह्मा चेल्लानी ने भी चीन पर आपदा से जुड़ी जानकारी को नियंत्रित करने का आरोप लगाया। उन्होंने चिंता जताई कि यदि जमीन पर मौजूद लोगों की जानकारी सार्वजनिक नहीं होगी तो संकट के दौरान वास्तविक स्थिति को समझना मुश्किल हो सकता है।
द भूटनीज के संपादक टेनजिंग लैमसांग ने भी ग्यिरोंग में हुई तबाही के स्तर और चीन की ओर से बताए गए शुरुआती मौत के आंकड़ों के बीच अंतर पर सवाल उठाए। हालांकि, इन दावों को फिलहाल आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है कि चीन ने जानबूझकर आपदा की पूरी जानकारी छिपाई।
नेपाल में तबाही का बड़ा असर
नेपाल में हालात बेहद गंभीर रहे। रॉयटर्स के मुताबिक 29 अगस्त तक देश में 675 लोगों की मौत हो चुकी थी, जबकि 2,400 से ज्यादा लोग लापता थे। फ्लैश फ्लड से सड़कें, पुल, बस्तियां और हाइड्रोपावर से जुड़ा बुनियादी ढांचा भी प्रभावित हुआ। कई इलाकों में राहत और खोज अभियान अभी भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ था।
भारत के विदेश मंत्रालय के मुताबिक नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई बाढ़ के बाद 275 से ज्यादा भारतीय अब भी लापता थे, जबकि 108 भारतीय नागरिकों को बचा लिया गया था। पिछले दो दिनों में 598 भारतीय चीन से सुरक्षित नेपाल पहुंच चुके थे। करीब 900 भारतीय चीन की तरफ मौजूद थे और उनके सुरक्षित होने की जानकारी दी गई थी।
बाढ़ के लिए बांध को जिम्मेदार ठहराने का सबूत नहीं
बाढ़ की वजह को लेकर चीन के किसी बांध या परियोजना को जिम्मेदार ठहराने वाले दावों का अभी कोई पुख्ता आधार सामने नहीं आया है। चीनी दूतावास ने उन दावों को खारिज किया, जिनमें कहा गया था कि चीन की तरफ कोई बांध टूटने से बाढ़ आई। चीन का कहना है कि आपदा की शुरुआत नेपाल की तरफ हुई प्राकृतिक घटना से हुई।
चीनी राजदूत झांग माओमिंग ने नेपाल के सरकारी चैनल NTV World से बातचीत में कहा कि शुरुआती जानकारी के अनुसार नेपाल की तरफ भूकंप के बाद बर्फ का एक बड़ा हिस्सा टूटा। इसके बाद हिमस्खलन और मलबे के तेज बहाव से बाढ़ की स्थिति बनी। चीन ने यह भी कहा कि वह नेपाल के साथ राहत और बचाव अभियान में सहयोग कर रहा है।
सवाल बाढ़ से ज्यादा अब जानकारी पर
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर बाढ़ के लिए चीन के किसी ढांचे को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा। लेकिन तिब्बत की तरफ से सामने आने वाली जानकारी को लेकर सवाल जरूर उठ रहे हैं। किसी भी बड़ी प्राकृतिक आपदा में जमीन पर मौजूद लोगों की तस्वीरें और वीडियो बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इनसे परिवारों, बचाव दलों और दुनिया को यह समझने में मदद मिलती है कि किस इलाके में कितना नुकसान हुआ है।
यही वजह है कि ग्यिरोंग के वीडियो हटाए जाने के दावों ने चीन की सूचना व्यवस्था को लेकर बहस छेड़ दी है। एक तरफ सरकारी रेस्क्यू फुटेज सामने आ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय लोगों की कुछ सोशल मीडिया पोस्ट गायब होने की बात कही जा रही है। अब सवाल यही है कि तिब्बत की तरफ हुई तबाही की पूरी तस्वीर दुनिया तक कितनी पहुंच पाती है।