मौत से पहले यमदूत कब आते हैं?
गरुड़ पुराण में विशेष रूप से पाप कर्म करने वाले व्यक्ति की मृत्यु के समय यमदूतों के आने का भयावह वर्णन मिलता है। ग्रंथ के अनुसार मृत्यु का अंतिम समय नजदीक आने पर शरीर धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगता है और इंद्रियां ठीक तरह से काम करना बंद करने लगती हैं। सांस लेने में परेशानी हो सकती है और व्यक्ति बोलने की स्थिति में भी नहीं रह जाता।
मृत्यु के अंतिम समय शरीर में क्या होता है?
गरुड़ पुराण के वर्णन के अनुसार अंतिम समय में व्यक्ति की सांस भारी हो जाती है। मुंह में झाग और लार आने जैसी स्थितियों का भी उल्लेख मिलता है। शरीर की सामान्य क्रियाएं कमजोर पड़ने लगती हैं और धीरे-धीरे जीवन के अंतिम क्षण आते हैं। यह वर्णन धार्मिक ग्रंथ की मान्यताओं पर आधारित है।
यमदूत कब आते हैं?
गरुड़ पुराण के एक वर्णन के अनुसार जब व्यक्ति की इंद्रियां क्षीण होने लगती हैं और मृत्यु का समय करीब आता है, तब यम के दूत वहां पहुंचते हैं। विशेष रूप से पापी व्यक्ति के संदर्भ में दो यमदूतों का वर्णन मिलता है। ग्रंथ में उन्हें भयावह रूप वाला बताया गया है और उनके हाथों में पाश तथा दंड होने का उल्लेख मिलता है।
धार्मिक वर्णन के अनुसार यमदूतों को देखकर मृत्यु के करीब पहुंचा व्यक्ति भयभीत हो जाता है। इसका अर्थ यह है कि गरुड़ पुराण के इस प्रसंग में यमदूतों का आगमन मृत्यु के बिल्कुल अंतिम चरण से जुड़ा हुआ बताया गया है।
आत्मा को शरीर से अलग करने का वर्णन
गरुड़ पुराण में मृत्यु के समय स्थूल शरीर और उससे अलग होने वाली चेतना के संबंध में भी वर्णन मिलता है। पापी व्यक्ति के संदर्भ में कहा गया है कि यमदूत शरीर से आत्मा को बाहर निकालकर ले जाते हैं। ग्रंथ में आत्मा के स्वरूप को अंगूठे के समान सूक्ष्म बताया गया है।
धार्मिक वर्णन के अनुसार जब आत्मा शरीर से अलग होती है तो वह अपने पीछे छूटे शरीर को देखती है। इसके बाद यमदूत उसे यम के मार्ग पर लेकर जाते हैं।
13वें दिन से जुड़ा अलग वर्णन
गरुड़ पुराण के अलग-अलग प्रसंगों को समझना जरूरी है। मृत्यु के अंतिम क्षण में यमदूतों के आने का वर्णन एक जगह मिलता है, जबकि प्रेतकल्प के आगे के अध्यायों में मृत्यु के बाद की यात्रा और 13वें दिन से जुड़ा अलग प्रसंग मिलता है।
प्रेतकल्प के एक प्रसंग में बताया गया है कि 13वें दिन प्रेत को यम के सेवक पकड़कर महान मार्ग पर ले जाते हैं। इस यात्रा के लिए पिंडों से बने शरीर का भी उल्लेख मिलता है। इसी वजह से धार्मिक परंपरा में मृत्यु के बाद होने वाले 10वें, 11वें, 12वें और 13वें दिन के संस्कारों को महत्वपूर्ण माना जाता है।
गरुड़ पुराण के वर्णन में 11वें और 12वें दिन मृत व्यक्ति के लिए दिए जाने वाले अन्न आदि का उल्लेख मिलता है। 13वें दिन उसे यम के मार्ग पर ले जाने की बात कही गई है।
मृत्यु के बाद कर्मों के आधार पर यात्रा
गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद की यात्रा को कर्मों से जोड़कर देखा गया है। पाप कर्म करने वाले व्यक्ति के लिए यमलोक की यात्रा कठिन और भयावह बताई गई है। वहीं धार्मिक व्याख्याओं में पुण्य कर्म करने वाले व्यक्ति की यात्रा अपेक्षाकृत शांत और सुगम मानी जाती है।
प्रेतकल्प के एक श्लोक में पापियों के लिए गर्मी, ठंड, कांटों, अग्नि और अन्य कष्टों से भरे मार्ग का वर्णन मिलता है। इसके विपरीत संयमी और धर्मपरायण व्यक्ति के लिए उसी मार्ग को अपेक्षाकृत शांत बताया गया है।
यमलोक की यात्रा कैसी बताई गई है?
गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा यम के नगर की ओर होती है। इस मार्ग में कई स्थानों और कठिनाइयों का वर्णन मिलता है। पापी व्यक्ति को रास्ते में भूख-प्यास और अन्य कष्टों का सामना करना पड़ता है। यम के दूत उसे आगे लेकर जाते हैं।
प्रेतकल्प में यह भी कहा गया है कि यम के पाश में बंधा प्रेत अपने घर को छोड़कर यम के नगर की ओर जाता है। आगे कई मार्गों का वर्णन किया गया है, जिसके बाद यम के नगर तक पहुंचने की बात आती है।
क्या हर व्यक्ति को यमदूत दिखाई देते हैं?
गरुड़ पुराण के मूल वर्णन को देखते हुए यह कहना उचित नहीं होगा कि हर मरने वाले व्यक्ति को बिल्कुल एक जैसे यमदूत दिखाई देते हैं। उपलब्ध वर्णन मुख्य रूप से पापी व्यक्ति की मृत्यु और उसके बाद की यात्रा के संदर्भ में है। बाद की धार्मिक मान्यताओं में यमदूतों को मृत्यु का संकेत माना गया है।
कुछ आधुनिक धार्मिक लेखों में यह भी बताया जाता है कि मृत्यु से पहले व्यक्ति को यमदूत दिखाई दे सकते हैं, लेकिन ऐसी बातों को धार्मिक मान्यता के रूप में ही समझना चाहिए। इन्हें वैज्ञानिक तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।
गरुड़ पुराण की सीख क्या है?
गरुड़ पुराण में मृत्यु का वर्णन केवल भय पैदा करने के लिए नहीं माना जाता। इसके पीछे कर्म के सिद्धांत को समझाने का उद्देश्य भी दिखाई देता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार व्यक्ति के अच्छे और बुरे कर्मों का फल उसे प्राप्त होता है।
मृत्यु के समय शरीर, धन-दौलत और सांसारिक रिश्ते पीछे छूट जाते हैं। धार्मिक दृष्टिकोण से व्यक्ति के साथ उसके कर्म ही आगे जाते हैं। इसी वजह से गरुड़ पुराण में जीवन में धर्म, दान और अच्छे कर्मों को महत्व दिया गया है।