देसी कंपनियां बनाएंगी DRDO की मिसाइलें

देसी कंपनियां बनाएंगी DRDO की मिसाइलें

📅 August 26, 2026 🏷️ India/Defence ✍️ NewsTime Editorial
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। उन्होंने डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन यानी DRDO द्वारा विकसित सभी पारंपरिक मिसाइल सिस्टम की तकनीक भारतीय उद्योग को ट्रांसफर करने की मंजूरी दे दी है। इस ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी प्रक्रिया के जरिए अब इन मिसाइल प्रणालियों का उत्पादन देश के भीतर ही भारतीय कंपनियों द्वारा किया जा सकेगा। इससे रक्षा क्षेत्र में निजी उद्योग की भागीदारी बढ़ने के साथ-साथ भारत की घरेलू उत्पादन क्षमता को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। अभी तक DRDO द्वारा विकसित कई तकनीकों का इस्तेमाल मुख्य रूप से सरकारी रक्षा संस्थानों और अधिकृत प्रतिष्ठानों के माध्यम से किया जाता रहा है। अब इन तकनीकों को भारतीय इंडस्ट्री तक पहुंचाने से निजी कंपनियों के लिए मिसाइल निर्माण के क्षेत्र में प्रवेश और विस्तार के नए रास्ते खुलेंगे। हालांकि कंपनियों को उत्पादन शुरू करने से पहले निर्धारित तकनीकी योग्यताओं, प्रमाणपत्रों और नियामक मानकों को पूरा करना होगा। सरकार का यह कदम आत्मनिर्भर भारत अभियान और रक्षा उत्पादन में स्वदेशी क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस फैसले के बाद भारतीय कंपनियां DRDO द्वारा विकसित तकनीक के आधार पर एडवांस मिसाइल सिस्टम का निर्माण देश में कर सकेंगी। इससे मिसाइल निर्माण की पूरी सप्लाई चेन को भारत के भीतर विकसित करने में मदद मिलेगी। DRDO की भूमिका भी धीरे-धीरे सिर्फ मिसाइलों और हथियार प्रणालियों के विकास तक सीमित रहने के बजाय विकसित तकनीकों को औद्योगिक स्तर पर उत्पादन के लिए उपलब्ध कराने की दिशा में आगे बढ़ेगी। इसका फायदा छोटे और मझोले उद्यम यानी MSME तथा अन्य तकनीकी साझेदार कंपनियों को भी मिल सकता है। रक्षा क्षेत्र की सप्लाई चेन में नई कंपनियों के शामिल होने से रोजगार के अवसर बढ़ने और नई तकनीकों के विकास को गति मिलने की उम्मीद है।

इस पहल का एक बड़ा उद्देश्य रक्षा उपकरणों और मिसाइल प्रणालियों के लिए विदेशी आयात पर भारत की निर्भरता को कम करना है। वर्तमान में कई अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियों और उपकरणों के लिए भारत को अलग-अलग स्तर पर विदेशी तकनीक या आयात पर निर्भर रहना पड़ता है। घरेलू कंपनियों को DRDO की विकसित तकनीक उपलब्ध होने से देश अपनी जरूरत के अनुसार कई मिसाइल प्रणालियों का उत्पादन खुद करने में सक्षम हो सकता है। इससे विदेशी मुद्रा की बचत होने के साथ-साथ आपातकालीन परिस्थितियों में रक्षा उपकरणों की आपूर्ति को बनाए रखने में भी मदद मिल सकती है। घरेलू उत्पादन बढ़ने से रक्षा क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और नवाचार को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। अलग-अलग भारतीय कंपनियां तकनीक और उत्पादन क्षमता के आधार पर नए समाधान विकसित कर सकती हैं।

DRDO द्वारा विकसित पारंपरिक मिसाइल सिस्टम की तकनीक उद्योग को ट्रांसफर करने का फैसला रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में निजी भागीदारी को मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है। इसके तहत कंपनियों को तकनीकी मानकों और जरूरी प्रमाणपत्रों का पालन करना होगा। उत्पादन की प्रक्रिया निर्धारित नियमों और नियामकीय मंजूरियों के अनुसार ही आगे बढ़ेगी। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि रक्षा क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाली मिसाइल प्रणालियां आवश्यक गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर खरी उतरें। तकनीक मिलने के बाद कंपनियां उत्पादन क्षमता विकसित करने के साथ-साथ अपनी विशेषज्ञता को भी बढ़ा सकेंगी।

MSME के लिए भी यह फैसला महत्वपूर्ण हो सकता है क्योंकि मिसाइल निर्माण की पूरी प्रक्रिया में केवल बड़ी कंपनियां ही नहीं, बल्कि छोटे और मझोले उद्योग भी अलग-अलग स्तर पर योगदान दे सकते हैं। कंपोनेंट निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग और तकनीकी सेवाओं से जुड़ी कंपनियां रक्षा सप्लाई चेन का हिस्सा बन सकती हैं। इससे देश में रक्षा क्षेत्र से जुड़े कौशल और औद्योगिक क्षमता को विकसित करने में मदद मिलेगी। भारतीय कंपनियां नई तकनीकों के साथ काम करके भविष्य में वैश्विक रक्षा बाजार में भी अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ा सकती हैं।

सरकार की इस पहल से लंबे समय में भारत के रक्षा उद्योग को एक मजबूत घरेलू आधार मिलने की उम्मीद है। अगर भारतीय कंपनियां तकनीक का सफलतापूर्वक इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर उत्पादन करने में सक्षम होती हैं, तो इससे भारतीय सशस्त्र बलों को स्वदेशी हथियार प्रणालियां उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज हो सकती है। साथ ही देश की रणनीतिक और रक्षा जरूरतों के लिए विदेशी आपूर्ति पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिल सकती है। भविष्य में भारत अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के साथ रक्षा उत्पादों के निर्यात की दिशा में भी आगे बढ़ सकता है। राजनाथ सिंह द्वारा DRDO की मिसाइल तकनीक को भारतीय उद्योग के लिए उपलब्ध कराने का फैसला इसी व्यापक आत्मनिर्भरता की नीति का हिस्सा है, जिससे देश की रक्षा निर्माण क्षमता, निजी क्षेत्र की भागीदारी, MSME के अवसर और स्वदेशी तकनीकी विकास को गति मिलने की उम्मीद है।

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