BJP को हाशिए पर धकेलने तक संन्यास नहींः ममता
ममता बनर्जी ने अपने संबोधन में जाधवपुर यूनिवर्सिटी से जुड़े हालिया विवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने बीजेपी पर विश्वविद्यालय परिसर में हंगामा कराने और यूनिवर्सिटी के प्रतीक चिह्न को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। ममता ने कहा कि छात्रों के साथ उनके राजनीतिक या वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन वह छात्रों का सम्मान करती हैं। उन्होंने विश्वविद्यालयों और छात्रों के मामलों में राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर भी अपनी चिंता जाहिर की। उनके बयान के मुताबिक, शिक्षा संस्थानों में विवादों को राजनीतिक टकराव में बदलने के बजाय संवाद और शांतिपूर्ण तरीके से हल किया जाना चाहिए।
ममता बनर्जी ने जनगणना प्रक्रिया को लेकर भी केंद्र सरकार और बीजेपी पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जनगणना की प्रक्रिया के जरिए गुप्त रूप से NRC लागू करने की कोशिश की जा सकती है। उनका दावा है कि इस प्रक्रिया को शुरू करने से पहले राजनीतिक दलों के साथ पर्याप्त सलाह-मशविरा नहीं किया गया। ममता ने लोगों को जनगणना फॉर्म भरते समय और अपनी निजी जानकारी साझा करते समय सावधानी बरतने की सलाह दी। उन्होंने सवाल उठाया कि लोगों को यह भरोसा कौन देगा कि जनगणना के दौरान दी गई व्यक्तिगत जानकारी का इस्तेमाल भविष्य में किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं किया जाएगा।
SIR यानी Special Intensive Revision यानी विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर भी ममता बनर्जी ने बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि SIR की प्रक्रिया के नाम पर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं। ममता ने इसे कथित तौर पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश बताया और बीजेपी पर चुनावी धांधली के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में किसी भी तरह का बदलाव पारदर्शी तरीके से होना चाहिए और वास्तविक मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए। ममता ने आरोप लगाया कि यदि योग्य मतदाताओं के नाम सूची से हटते हैं तो इसका सीधा असर लोकतांत्रिक अधिकारों पर पड़ सकता है।
अपने फेसबुक लाइव में ममता बनर्जी ने बीजेपी पर राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों को लेकर भी हमला बोला। उन्होंने बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा कि यह बीजेपी का हनीमून पीरियड नहीं बल्कि मनीमून पीरियड चल रहा है। इस बयान के जरिए उन्होंने बीजेपी पर सत्ता और धन के इस्तेमाल को लेकर निशाना साधा। ममता ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक विरोध और असहमति की आवाज को दबाया नहीं जाना चाहिए। उन्होंने अपने समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं से भी राजनीतिक संघर्ष को जारी रखने की अपील की।
ममता बनर्जी का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम बंगाल की राजनीति में बीजेपी और टीएमसी के बीच राजनीतिक टकराव लगातार चर्चा में बना हुआ है। ममता ने अपने संबोधन में कई मुद्दों को एक साथ उठाते हुए केंद्र और बीजेपी की नीतियों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने पुलिस कार्रवाई, जनगणना, SIR, मतदाता सूची और विश्वविद्यालय से जुड़े विवादों को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रखीं। वहीं, उनके राजनीतिक संन्यास को लेकर लगाए जा रहे कयासों को भी उन्होंने खारिज कर दिया। ममता के बयान से साफ है कि वह फिलहाल सक्रिय राजनीति से दूर जाने के मूड में नहीं हैं और बीजेपी के खिलाफ अपना राजनीतिक अभियान जारी रखने का संकेत दे रही हैं।