कांच के पिंजरे में 50 साल से कैद है ‘कैदी’

कांच के पिंजरे में 50 साल से कैद है ‘कैदी’

📅 August 31, 2026 🏷️ World/Crime ✍️ NewsTime Editorial
सोचिए, एक ऐसी जेल की कोठरी जहां कैदी का कमरा सामान्य दीवारों के बजाय बुलेटप्रूफ कांच और कंक्रीट से बना हो। जहां वह दिन के करीब 23 घंटे अकेला रहता हो और किसी दूसरे इंसान से उसका सीधा संपर्क लगभग न के बराबर हो। अगर उसे कमरे से बाहर निकालना हो तो उसके साथ कई सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी जरूरी हो। ब्रिटेन में कैदी रॉबर्ट मौड्सली की जिंदगी कुछ ऐसी ही बताई जाती है।

रॉबर्ट मौड्सली को ब्रिटेन के सबसे खतरनाक कैदियों में गिना जाता है। वह साल 1974 से जेल में बंद है और करीब पांच दशक से ज्यादा समय सलाखों के पीछे बिता चुका है। उसके खिलाफ चार हत्याओं का रिकॉर्ड है, जिनमें से तीन हत्याएं उसने जेल या संस्थागत हिरासत में रहते हुए की थीं। यही वजह है कि जेल प्रशासन उसे आज भी बेहद खतरनाक मानता है।

पहली हत्या के बाद शुरू हुआ जेल का सफर

रॉबर्ट मौड्सली की पहली हत्या 1974 में लंदन में हुई थी। उसने जॉन फैरेल नाम के व्यक्ति की हत्या कर दी थी। रिपोर्टों के अनुसार, फैरेल ने उसे बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी तस्वीरें दिखाई थीं। इस मामले के बाद मौड्सली को मुकदमे का सामना करने के लिए मानसिक रूप से अयोग्य माना गया और उसे ब्रिटेन के हाई-सिक्योरिटी मनोचिकित्सकीय अस्पताल ब्रॉडमूर भेज दिया गया। उसके कभी रिहा न किए जाने की सिफारिश भी की गई थी।

ब्रॉडमूर में भी नहीं रुका हिंसा का सिलसिला

साल 1977 में ब्रॉडमूर में रहते हुए मौड्सली और एक अन्य मरीज डेविड चीजमैन ने खुद को एक कमरे में बंद कर लिया। उनके साथ वहां डेविड फ्रांसिस भी था, जिसे बच्चों के यौन शोषण के मामले में दोषी ठहराया गया था। करीब नौ घंटे तक चले घटनाक्रम के बाद फ्रांसिस की मौत हो गई। इसके बाद मौड्सली को गिरफ्तार किया गया और उसे एचएमपी वेकफील्ड भेज दिया गया।

लेकिन जेल बदलने के बाद भी उसका हिंसक व्यवहार नहीं रुका। साल 1978 में वेकफील्ड जेल में उसने एक ही दोपहर में दो कैदियों की हत्या कर दी। पहले उसने सैल्नी डारवुड नाम के कैदी की हत्या की, जो अपनी पत्नी की हत्या के मामले में जेल में बंद था। इसके बाद वह विलियम रॉबर्ट्स की सेल तक पहुंचा। रॉबर्ट्स एक बच्ची के साथ यौन दुर्व्यवहार के मामले में सजा काट रहा था।

इन घटनाओं के बाद जेल प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई। मौड्सली सिर्फ बाहर के समाज के लिए ही नहीं, बल्कि जेल के अंदर मौजूद दूसरे कैदियों के लिए भी गंभीर खतरा माना जाने लगा।

बुलेटप्रूफ कांच से बनाई गई खास सेल

मौड्सली को नियंत्रित करने के लिए जेल प्रशासन ने साल 1983 में एक बेहद असामान्य व्यवस्था की। जेल की बेसमेंट में उसके लिए एक विशेष सेल बनाई गई। यह सेल बुलेटप्रूफ कांच और कंक्रीट से तैयार की गई थी और इसे आम तौर पर ‘ग्लास केज’ यानी कांच का पिंजरा कहा जाने लगा।

बताया जाता है कि यह सेल करीब 5.5 मीटर लंबी और 4.5 मीटर चौड़ी थी। इसके अंदर कंक्रीट का बेड, टॉयलेट और सिंक मौजूद थे। टेबल और कुर्सी भी ऐसे विशेष मटेरियल से बनाए गए थे, जिन्हें हथियार के तौर पर इस्तेमाल करना मुश्किल हो। इसकी तुलना कई बार फिल्म ‘द साइलेंस ऑफ द लैम्ब्स’ में दिखाए गए हनिबल लेक्टर के पिंजरे से की जाती है।

करीब 17,500 दिन एकांत में

रिपोर्टों के मुताबिक, मौड्सली ने करीब 17,500 दिन लगातार एकांत कारावास में बिताए हैं। इसे ब्रिटिश जेल इतिहास की सबसे लंबी एकांत हिरासत अवधियों में से एक माना जाता है। उसका दूसरे लोगों से शारीरिक संपर्क लगभग पूरी तरह सीमित कर दिया गया है।

जब उसे व्यायाम के लिए सेल से बाहर निकाला जाता है तो उसके साथ कम से कम चार सुरक्षाकर्मी रहते हैं। यहां तक कि पैर के नाखून काटने जैसी सामान्य प्रक्रिया भी विशेष सुरक्षा व्यवस्था के तहत की जाती है। उसके सेल के दरवाजे में बनी छोटी जगह से पैर बाहर निकालकर यह काम किया जाता है।

इतने लंबे एकांत कारावास पर उठे सवाल

मौड्सली को इतने लंबे समय तक अलग रखने को लेकर समय-समय पर सवाल भी उठते रहे हैं। साल 2000 में उसने अदालत से अपील की थी कि उसे मरने की अनुमति दी जाए। उसका सवाल था कि जब उसे रोजाना करीब 23 घंटे बंद रखा जाता है तो इसका उद्देश्य क्या है और वह वास्तव में किसके लिए खतरा है।

हालांकि, उसके पुराने अपराधों और जेल के अंदर किए गए हिंसक हमलों को देखते हुए उसे रिहाई नहीं मिली। जेल प्रशासन की नजर में उसका हिंसक इतिहास उसे उच्च सुरक्षा व्यवस्था में रखने का बड़ा कारण है।

अब भी हिंसा की आशंका

हालिया जेल इंटरव्यू से जुड़े बयानों में मौड्सली ने कथित तौर पर कहा कि अगर उसे किसी ऐसे यौन अपराधी को नुकसान पहुंचाने का मौका मिले, जिसने किसी व्यक्ति का यौन शोषण किया हो, तो वह ऐसा कर सकता है। उसने यह भी कहा कि अगर उसका सामना ऐसे व्यक्ति से हो जिसने उसका यौन शोषण किया हो, तो वह उसे मारने की कोशिश कर सकता है।

रॉबर्ट मौड्सली का मामला ब्रिटेन की जेल व्यवस्था में लंबे समय तक एकांत कारावास, बेहद खतरनाक कैदियों की निगरानी और जेल सुरक्षा को लेकर होने वाली बहस का एक असामान्य उदाहरण माना जाता है। उसकी कहानी यह भी दिखाती है कि अत्यधिक हिंसक व्यवहार वाले कैदियों को सुरक्षित रखने और उनसे बाकी लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बीच जेल प्रशासन के सामने कितनी कठिन चुनौतियां हो सकती हैं।

Comments (0)

Leave a Comment



Related Articles