समंदर में शार्क से भिड़ गई महिला
लिआ सुरक्षित माने जाने वाले तैराकी क्षेत्र में मौजूद थीं। अचानक शार्क उनके बेहद करीब आ गई और उसने अपना मुंह खोलना शुरू कर दिया। लिआ को लगा कि अगर उन्होंने कुछ नहीं किया तो शार्क सीधे उनके सिर पर हमला कर सकती है। ऐसे में उन्होंने डरने के बजाय उससे मुकाबला करने का फैसला किया।
लिआ दाएं हाथ से काम करती हैं। उन्हें डर था कि हमले में अगर किसी हाथ को गंभीर चोट लगी तो उनका दायां हाथ ज्यादा महत्वपूर्ण है। इसलिए उन्होंने अपना बायां हाथ आगे किया और पूरी ताकत से शार्क पर मुक्का मारा। लिआ का मानना है कि उनका यही बायां मुक्का उन्हें शार्क के हमले से बचने में मददगार साबित हुआ।
हालांकि, हमला बेहद गंभीर था और सिर्फ मुक्का मारने से खतरा खत्म नहीं हुआ। लिआ बुरी तरह घायल हो गईं। उनकी हालत इतनी गंभीर थी कि डॉक्टरों को कई ऑपरेशन करने पड़े। उन्हें करीब दो सप्ताह तक कोमा में रहना पड़ा। इलाज के दौरान उनका एक हाथ काटना पड़ा, जबकि दूसरे हाथ की नसों और टेंडन को भी गंभीर नुकसान पहुंचा। शुरुआत में वह अपने बचे हुए हाथ का इस्तेमाल भी ठीक से नहीं कर पा रही थीं।
हमले के दौरान लिआ के दिमाग में अपनी बेटी का ख्याल लगातार चल रहा था। उन्होंने बताया कि जब शार्क उनके पैर से चिपकी हुई थी, तब उन्हें डर था कि अगर वह इस हमले में नहीं बचीं तो उनकी बेटी बिना मां के रह जाएगी। इसी सोच ने उन्हें आखिरी दम तक संघर्ष करने की ताकत दी।
शार्क के हमले के बाद कूगी बीच पर मौजूद लोगों ने तुरंत इमरजेंसी सर्विस को सूचना दी। मौके पर मौजूद एक व्यक्ति ने ऑपरेटर को बताया कि समुद्र में शार्क ने हमला किया है और काफी खून बह रहा है। चैंपियनशिप पैडल बोर्डर चार्ली वर्को ने लिआ को पानी से बाहर निकालने में मदद की। इसके बाद इमरजेंसी रिस्पॉन्डर्स और मेडिकल टीम ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया।
लंबे इलाज और कई सर्जरी के बाद लिआ अब धीरे-धीरे सामान्य जिंदगी की ओर लौटने की कोशिश कर रही हैं। उनकी कहानी बताती है कि बेहद खतरनाक परिस्थिति में लिया गया कुछ सेकंड का फैसला भी जिंदगी बचाने में अहम भूमिका निभा सकता है। जब विशाल ग्रेट व्हाइट शार्क उनके चेहरे से कुछ ही सेंटीमीटर दूर थी, तब उन्होंने डर के आगे हार मानने के बजाय उसका सामना किया। उनका वही बायां मुक्का उनकी जिंदगी की सबसे मुश्किल लड़ाई का अहम हिस्सा बन गया।