54 करोड़ में बिकेगा UAE का भूतिया महल! 35 साल से था खाली, जानें क्या है रहस्य
54 करोड़ रुपये तक है कीमत
खलीज टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अल कासिमी पैलेस को बिना फर्नीचर के 22.5 मिलियन दिरहम यानी करीब 52 करोड़ रुपये में बेचा जा रहा है। अगर खरीदार महल में मौजूद पुराने सामान, कलाकृतियां और संग्रह भी लेना चाहता है तो इसकी कीमत 23.5 मिलियन दिरहम यानी लगभग 54 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
35 बेडरूम वाला आलीशान महल
यह कोई सामान्य घर नहीं है। महल करीब 1,91,742 वर्गफीट के प्लॉट पर बना है और इसका कुल बिल्ट-अप एरिया करीब 33,827 वर्गफीट है। इसमें 35 बेडरूम बताए गए हैं। प्रॉपर्टी की बिक्री की जिम्मेदारी बिशप एंड नाइट के पास है। कंपनी के मुताबिक, कई संभावित खरीदारों ने इस महल में दिलचस्पी दिखाई है।
भारत और ब्रिटेन से भी खरीदारों की दिलचस्पी
महल को लेकर सिर्फ UAE में ही नहीं बल्कि दूसरे देशों में भी दिलचस्पी दिखाई गई है। रियल एस्टेट सलाहकारों के मुताबिक, ब्रिटेन, भारत और आसपास के देशों से संभावित खरीदारों ने इसमें रुचि दिखाई है। कुछ संभावित खरीदारों की ओर से बोली लगाए जाने की बात भी सामने आई है। खरीदारों की दिलचस्पी की एक वजह रास अल खैमाह में बढ़ता पर्यटन और मरजान आईलैंड से जुड़ी भविष्य की संभावनाएं भी बताई जा रही हैं।
1985 में हुआ था निर्माण
अल कासिमी पैलेस का निर्माण 1985 में हुआ था। इसे रास अल खैमाह के शाही परिवार से जुड़े दिवंगत शेख अब्दुल अजीज बिन हुमैद अल कासिमी ने एक पहाड़ी के ऊपर बनवाया था। महल को बेहद भव्य तरीके से तैयार किया गया था। इसके निर्माण में ईरान, मोरक्को, भारत और चीन के कारीगरों ने काम किया था।
महल के अंदर है शानदार सजावट
महल के अंदर मोजाइक, पेंटेड टाइल्स, भित्तिचित्र और दीवारों पर बनाई गई कलाकृतियां मौजूद हैं। यहां फ्रांस और बेल्जियम के क्रिस्टल झूमर लगाए गए थे। दीवारों पर कबूतर और उल्लू जैसी आकृतियां भी बनाई गई थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, महल के निर्माण में 500 मिलियन दिरहम से ज्यादा खर्च हुआ था।
शेख खुद कभी नहीं रहे इस महल में
इतना भव्य महल बनने के बावजूद शेख अब्दुल अजीज इसमें कभी नहीं रहे। इसकी एक वजह परिवार के भीतर बताई जाने वाली आपत्ति थी। महल में इंसानों और जानवरों की आकृतियों वाली कई मूर्तियां और कलाकृतियां बनाई गई थीं, जिन्हें लेकर परिवार के कुछ सदस्यों को आपत्ति थी। इसके बाद महल लंबे समय तक खाली पड़ा रहा।
कैसे बना 'भूतिया महल'?
महल के लंबे समय तक वीरान रहने के दौरान इसके बारे में कई तरह की कहानियां फैलने लगीं। स्थानीय लोगों के बीच महल से अजीब आवाजें आने और रात में लाइटें अपने आप जलने-बुझने जैसी बातें कही जाने लगीं। धीरे-धीरे इन कहानियों की वजह से अल कासिमी पैलेस की पहचान 'भूतिया महल' के रूप में होने लगी। हालांकि, इन कथित घटनाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
2019 में आम लोगों के लिए खुला था महल
करीब तीन दशक तक खाली रहने के बाद 2019 में तारिक अहमद अल शरहान ने इस महल को नया रूप दिया। इसे एक म्यूजियम में बदल दिया गया और इसका नाम अल कैसर अल गमेद रखा गया, जिसका अर्थ 'रहस्य का महल' बताया जाता है। इसके बाद आम लोग भी इसे देखने जा सकते थे। यहां प्रवेश के लिए प्रति व्यक्ति 75 दिरहम की फीस रखी गई थी।
अब नए मालिक के पास होंगे कई विकल्प
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस महल का अगला मालिक इसका क्या इस्तेमाल करेगा। रियल एस्टेट सलाहकारों के मुताबिक, इसे निजी घर, होटल, टूरिस्ट डेस्टिनेशन या इवेंट्स के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए जरूरी मंजूरियां लेनी होंगी। कोई खरीदार इसे निजी एस्टेट के रूप में विकसित कर सकता है, जबकि कोई निवेशक इसे होटल या पर्यटन से जुड़ी प्रॉपर्टी में बदल सकता है।
महल पर नहीं है विरासत संबंधी पाबंदी
रिपोर्ट के मुताबिक, इस महल पर किसी तरह की विरासत संबंधी पाबंदी नहीं है। ऐसे में नए मालिक के पास प्रॉपर्टी को अपनी जरूरत के मुताबिक रेनोवेट करने, डिजाइन बदलने या दोबारा विकसित करने की काफी स्वतंत्रता हो सकती है। कभी रहस्यमयी कहानियों की वजह से चर्चा में रहा यह महल अब करोड़ों रुपये की प्रॉपर्टी के तौर पर बाजार में है।