'सिर्फ कब्रिस्तानों को देखने पूरी दुनिया घूमती हूं'
कई लोगों को उनका यह शौक अजीब या डरावना लग सकता है, लेकिन ट्रेसी के लिए कब्रिस्तान इतिहास, खूबसूरती और अनकही कहानियों से भरी जगह हैं। उन्हें उन लोगों की जिंदगी के बारे में जानना पसंद है, जिनकी कहानियां समय के साथ भुला दी गई हैं। वह कब्रों की तस्वीरें खींचती हैं, वहां दफन लोगों के बारे में रिसर्च करती हैं और उनकी खोजी गई जानकारी को परिवारों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं।
कब्रिस्तानों को एक्सप्लोर करने का ट्रेसी का शौक अचानक शुरू नहीं हुआ। यूनिवर्सिटी के दिनों में वह एक स्थानीय अखबार में इंटर्न थीं, जहां वह मृत्युलेख यानी ऑबिच्यूरी लिखती थीं। इसी दौरान अंतिम संस्कार से जुड़े लोगों के संपर्क में आने के कारण उन्हें लोगों की जिंदगी और उनकी मौत से जुड़ी कहानियों में दिलचस्पी पैदा हुई।
बाद में बेटे के जन्म के बाद उन्हें 'Find a Grave' नाम की वेबसाइट के बारे में पता चला। इस वेबसाइट पर दुनिया भर के कब्रिस्तानों और वहां दफन लोगों से जुड़ी जानकारी जुटाई जाती है। ट्रेसी को पता चला कि लोग दूसरों की कब्रों की तस्वीरें खींचकर वेबसाइट पर जानकारी साझा करने में मदद कर सकते हैं।
ट्रेसी को यह विचार काफी पसंद आया। अगर किसी व्यक्ति की कोई रिश्तेदार विदेश में दफन है और परिवार वहां जाकर उसकी कब्र नहीं देख सकता, तो कोई स्थानीय व्यक्ति उसकी तस्वीर लेकर परिवार तक पहुंचा सकता है। ट्रेसी के लिए यह काम लोगों की मदद करने के साथ-साथ उन्हें घर से बाहर निकलकर नई जगहें देखने का मौका भी देता था।
उनके शुरुआती प्रोजेक्ट्स में से एक ऐसी जगह की कब्रों को रिकॉर्ड करना था, जहां एक पुराने प्लांटेशन के पास गुलाम बनाए गए लोगों के वंशज दफन थे। इस अनुभव ने उनकी दिलचस्पी को और बढ़ा दिया। इसके बाद जब भी वह किसी कब्रिस्तान में जातीं, तो सिर्फ तस्वीर लेकर वापस नहीं आती थीं। वह वहां दफन व्यक्ति के बारे में विस्तार से जानकारी जुटाने लगती थीं।
वह जन्म और मृत्यु की तारीख से लेकर पुराने अखबारों में छपी खबरों और परिवार से जुड़ी जानकारी तक तलाश करती हैं। अपनी रिसर्च के बाद वह इन कहानियों को परिवार के सदस्यों के साथ साझा करती हैं या अपने ब्लॉग पर लिखती हैं।
ट्रेसी के लिए कब्रों की सबसे खास बात यह है कि एक छोटा सा पत्थर भी किसी बड़ी कहानी का सुराग दे सकता है। नेब्रास्का के एक कब्रिस्तान में उन्हें करीब 20 साल की उम्र के एक युवा दंपति की कब्र मिली। दोनों की मौत एक-दूसरे की मौत के करीब एक-दो हफ्ते के अंदर हुई थी।
ट्रेसी ने जब इस दंपति के बारे में रिसर्च की तो पता चला कि दोनों की मौत स्पेनिश फ्लू महामारी के दौरान हुई थी। उन्हें एक पुरानी अखबार की खबर भी मिली, जिसमें बताया गया था कि इस दंपति का अंतिम संस्कार शहर के बीचोंबीच किया गया था, क्योंकि वे समुदाय में काफी लोकप्रिय थे और उनकी मौत से पूरा इलाका दुखी था।
ट्रेसी मानती हैं कि अगर उन्होंने उस कब्र के बारे में आगे जानकारी नहीं जुटाई होती, तो शायद इस दंपति की कहानी हमेशा के लिए भुला दी जाती। उनके लिए यही इस शौक की सबसे बड़ी अहमियत है।
ट्रेसी का मानना है कि हर कब्र, चाहे वह कितनी भी साधारण क्यों न हो, अपने अंदर एक कहानी छिपाए होती है। कई कब्रों पर सिर्फ छोटा सा निशान होता है और कभी-कभी किसी इंसान के बारे में बची हुई आखिरी जानकारी वही होती है। कुछ लोगों का नाम जनगणना के रिकॉर्ड में नहीं मिलता, कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं होता और अखबारों में भी उनके बारे में कुछ नहीं छपा होता। हालांकि वे अपने परिवार के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहे होंगे।
ट्रेसी की यात्राएं सिर्फ आम लोगों की कब्रों तक सीमित नहीं हैं। वह राष्ट्रपतियों, नागरिक अधिकारों के नेताओं और मशहूर साहित्यकारों की कब्रें भी देख चुकी हैं। उनका लक्ष्य अमेरिका के सभी राष्ट्रपतियों की कब्रों तक पहुंचना है और अब तक वह करीब आधे राष्ट्रपतियों की कब्रें देख चुकी हैं। उन्होंने नागरिक अधिकार नेता मार्टिन लूथर किंग जूनियर की कब्र भी देखी है।
अपने पति क्रिस के साथ वह ऑक्सफोर्ड में मशहूर लेखक सी.एस. लुईस की कब्र पर भी गई थीं। इसके अलावा उन्होंने वेस्टमिंस्टर एबे का दौरा किया, जहां क्वीन एलिजाबेथ प्रथम दफन हैं। उनके दोस्त और पति जानते हैं कि किसी भी यात्रा के दौरान कब्रिस्तान का एक डिटोर जरूर हो सकता है।
लोग अक्सर कब्रिस्तान को डर और भूतों से जोड़ते हैं, लेकिन ट्रेसी वहां आत्माओं से बात करने या भूत देखने नहीं जातीं। उनके लिए कब्रिस्तान एक तरह के लिविंग म्यूजियम हैं, जहां इंसान इतिहास और बीते समय को करीब से समझ सकता है।
ट्रेसी का कहना है कि आज इंटरनेट, जानकारी, खाना और शहर सब कुछ तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन कब्रिस्तान तेज नहीं होते। वहां धीरे-धीरे चला जा सकता है, आसपास देखा जा सकता है और बीते समय को महसूस किया जा सकता है। उनका मानना है कि कब्रिस्तान सिर्फ उदासी या डर की जगह नहीं हैं।
वह पुराने दौर के उन कब्रिस्तानों का भी जिक्र करती हैं, जिन्हें पार्क की तरह बनाया जाता था। लोग वहां किताबें पढ़ते थे, पिकनिक करते थे या रविवार की सैर पर जाते थे। उन्हें कब्रिस्तानों में मिलने वाला कभी-कभी का अनोखा हास्य भी दिलचस्प लगता है, जैसे ऐसी कब्रें जहां किसी महिला के दोनों तरफ उसके दो पति दफन हों या किसी पुरुष के बीच में उसकी दो पत्नियों की कब्रें हों।
दूसरों की कब्रों की तलाश में दुनिया घूमने वाली ट्रेसी ने अभी तक यह तय नहीं किया है कि उनकी अपनी आखिरी जगह कहां होगी। उनका कहना है कि संभव है कि उनकी अस्थियां परिवार के पास किसी खूबसूरत कब्रिस्तान में रखी जाएं, लेकिन फिलहाल उन्होंने इस बारे में कोई अंतिम फैसला नहीं किया है।
हालांकि एक कब्रिस्तान ऐसा है, जहां ट्रेसी कैमरा और नोटबुक लेकर नहीं बल्कि फूल लेकर जाती हैं। वह उनके पिता लैरी की कब्र है। ट्रेसी बताती हैं कि उनके पिता लंबे समय से बीमार थे। एक दिन परिवार उनके लिए कब्र की जगह चुनकर घर लौटा और करीब आधे घंटे बाद दोपहर 12 बजे उनके पिता का निधन हो गया। परिवार ने उनके साथ धार्मिक पाठ पढ़े और अपनी बातें कहीं। उनके पिता उस समय बोल नहीं पा रहे थे, लेकिन परिवार को यकीन था कि वह उनकी बातें सुन रहे थे। उन्होंने परिवार के बीच शांतिपूर्वक अंतिम सांस ली।
ट्रेसी के लिए वह पल आज भी उनकी जिंदगी की सबसे यादगार घटनाओं में से एक है। शायद यही वजह है कि उनके लिए कब्रिस्तान सिर्फ मौत की जगह नहीं हैं। उनके लिए ये उन लोगों की आखिरी निशानी हैं, जिनकी जिंदगी में कभी परिवार, प्यार, सपने और अपनी कहानियां हुआ करती थीं। वह दुनिया भर के कब्रिस्तानों की यात्रा करके इन्हीं भूली-बिसरी कहानियों को फिर से सामने लाने की कोशिश करती हैं।