जमीन पर नहीं, पेड़ों पर रहते हैं लोग! 20 मीटर ऊंचे पेड़ों पर बनाते हैं घर

जमीन पर नहीं, पेड़ों पर रहते हैं लोग! 20 मीटर ऊंचे पेड़ों पर बनाते हैं घर

📅 September 28, 2026 🏷️ World/Interesting ✍️ NewsTime Editorial
दुनिया में आज भी ऐसे कई समुदाय मौजूद हैं जिनकी जीवनशैली आधुनिक शहरों से बिल्कुल अलग है। इंडोनेशिया के पापुआ क्षेत्र में रहने वाली कोरोवाई जनजाति भी अपनी अनोखी जीवनशैली के लिए जानी जाती है। इस समुदाय के कुछ लोग घने जंगलों में जमीन पर घर बनाने के बजाय ऊंचे पेड़ों पर घर बनाकर रहते हैं।

15 से 20 मीटर ऊंचाई पर घर
कोरोवाई समुदाय के पेड़ों पर बने घर जमीन से करीब 15 से 20 मीटर ऊपर हो सकते हैं। इन घरों को पेड़ों की मजबूत शाखाओं और तनों के सहारे बनाया जाता है। जंगल में उपलब्ध लकड़ी, बेंत और साबूदाना के पत्तों जैसी प्राकृतिक सामग्रियों का इस्तेमाल इनके निर्माण में किया जाता है।

पेड़ों पर घर बनाने की वजह
पेड़ों पर घर बनाने के पीछे कई कारण बताए जाते हैं। ऊंचाई पर रहने से कुछ जंगली जानवरों और दूसरे खतरों से दूरी बनी रहती है। इसके अलावा कोरोवाई लोगों की पारंपरिक मान्यताएं भी उनकी जीवनशैली को प्रभावित करती हैं। कुछ मान्यताओं में जमीन को बुरी आत्माओं से जोड़कर देखा जाता है, इसलिए ऊंचाई पर रहना उनके लिए सुरक्षा और परंपरा दोनों से जुड़ा हो सकता है।

जंगल पर निर्भर है जीवन
कोरोवाई समुदाय की पारंपरिक जीवनशैली जंगल से गहराई से जुड़ी हुई है। शिकार, फल, कंद और जंगल से मिलने वाले दूसरे प्राकृतिक संसाधन उनके भोजन और रोजमर्रा की जरूरतों का हिस्सा हैं। जंगल उनके लिए सिर्फ रहने की जगह नहीं बल्कि भोजन और जीवनयापन का मुख्य स्रोत भी है।

घर बनाने में खास हुनर
पेड़ों पर घर बनाना आसान काम नहीं है। इन घरों को ऊंचाई पर मजबूत बनाए रखने के लिए लकड़ी और दूसरे प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल किया जाता है। कोरोवाई लोग अपने पारंपरिक ज्ञान के आधार पर पेड़ों पर संरचनाएं तैयार करने में कुशल माने जाते हैं।

परंपराओं से जुड़ी जीवनशैली
कोरोवाई लोगों की जीवनशैली लंबे समय से उनकी स्थानीय परंपराओं और जंगल के वातावरण से जुड़ी रही है। हालांकि उन्हें पूरी तरह आधुनिक दुनिया से अलग या पाषाण युग में रहने वाला समुदाय कहना सही नहीं होगा। समय के साथ बाहरी दुनिया से उनका संपर्क भी बढ़ा है और समुदाय के अलग-अलग समूहों की जीवनशैली में अंतर देखा जाता है।

भोजन और रोजमर्रा का जीवन
पारंपरिक रूप से जंगल से मिलने वाले भोजन पर कोरोवाई लोगों की निर्भरता रही है। शिकार और भोजन जुटाने के अलावा फल, कंद और दूसरे प्राकृतिक संसाधन भी उनकी जरूरतों को पूरा करते हैं। परिवार और समुदाय के भीतर अलग-अलग सदस्य भोजन जुटाने, बच्चों की देखभाल और घरेलू कामों में योगदान देते हैं।

दुनिया के लिए क्यों खास है यह समुदाय?
पेड़ों पर इतने ऊंचे घर बनाकर रहने की परंपरा कोरोवाई समुदाय को दुनिया की सबसे दिलचस्प स्वदेशी जीवनशैलियों में शामिल करती है। घने जंगलों के बीच उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल करके घर बनाना और जीवन की जरूरतें पूरी करना उनके पारंपरिक पर्यावरणीय ज्ञान को दर्शाता है।

आधुनिक दुनिया से बढ़ रहा संपर्क
कोरोवाई समुदाय के कुछ समूह अब बाहरी दुनिया के संपर्क में भी आए हैं। पर्यटन, मीडिया और शोधकर्ताओं के जरिए इस समुदाय की जीवनशैली दुनिया के सामने आई है। इसके बावजूद उनके पारंपरिक पेड़-घर और जंगल पर आधारित जीवन आज भी लोगों की जिज्ञासा का विषय बने हुए हैं।

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