दर्द की दवा खा-खाकर किडनी कर रहे खराब, बिना सलाह पेनकिलर लेना पड़ सकता है भारी
दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग में डॉ. वैभव तिवारी के मुताबिक उनकी ओपीडी में हर हफ्ते ऐसे मरीज आते हैं, जिनकी किडनी पर लंबे समय तक पेनकिलर लेने का असर पड़ा है। इनमें कई लोग ऐसे होते हैं, जो कई सालों से बिना डॉक्टर की सलाह के दर्द की दवाएं ले रहे थे। कोई घुटने के दर्द के लिए तो कोई सिरदर्द या पीठ दर्द के लिए नियमित रूप से पेनकिलर ले रहा था। चिंता की बात यह है कि किडनी से जुड़ी यह समस्या 30 से 40 साल की उम्र के लोगों में भी देखने को मिल रही है।
कई लोग दर्द को बीमारी मानकर इलाज कराने के बजाय रोज पेनकिलर लेना शुरू कर देते हैं। शुरुआत में उन्हें यह महसूस नहीं होता कि दवा उनकी किडनी को नुकसान पहुंचा रही है। किडनी पर होने वाला असर धीरे-धीरे बढ़ सकता है और इसके लक्षण कई साल बाद दिखाई दे सकते हैं।
किडनी पर कैसे असर करती है पेनकिलर
डॉक्टरों के मुताबिक लंबे समय तक या ज्यादा मात्रा में कुछ पेनकिलर लेने से किडनी में ब्लड फ्लो कम हो सकता है। इससे किडनी की फिल्टर करने वाली यूनिट्स पर दबाव पड़ता है और उसकी कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। शरीर में प्रोटीन और क्रिएटिनिन के स्तर में बदलाव भी किडनी की खराबी का संकेत हो सकता है।
डॉ. वैभव तिवारी के मुताबिक शरीर में प्रोस्टाग्लैंडिन्स नाम के केमिकल्स होते हैं, जो किडनी की नसों को फैलाकर रखने में मदद करते हैं। इससे किडनी में ब्लड फ्लो सही बना रहता है। कुछ पेनकिलर इन केमिकल्स के बनने को रोक सकती हैं। इसके कारण रक्त वाहिकाएं सिकुड़ सकती हैं और किडनी तक पर्याप्त मात्रा में खून नहीं पहुंच पाता। ऐसी स्थिति में अचानक किडनी कमजोर होने या एक्यूट किडनी इंजरी का खतरा बढ़ सकता है।
हर महीने 10 से 15 मरीजों में दिख रहा असर
दिल्ली के श्रीबालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टिट्यूट हॉस्पिटल के नेफ्रोलॉजी विभाग के डायरेक्टर डॉ. राजेश अग्रवाल के मुताबिक उनके पास हर महीने करीब 10 से 15 ऐसे मरीज आते हैं, जिनकी किडनी पर लंबे समय तक पेनकिलर लेने का असर पड़ा होता है। इनमें ज्यादातर मरीज सिरदर्द, कमर दर्द, घुटनों या जोड़ों के दर्द के लिए बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं लेते रहते हैं।
कई लोग दर्द होते ही मेडिकल स्टोर से दवा खरीदकर खुद ही खाना शुरू कर देते हैं और दर्द ठीक होने के बावजूद लंबे समय तक इसे जारी रखते हैं। पेनकिलर लेने के बाद तुरंत राहत मिलने की वजह से लोगों को लगता है कि यह सामान्य और पूरी तरह सुरक्षित दवा है। हालांकि कुछ दवाओं का लंबे समय तक या ज्यादा मात्रा में इस्तेमाल किडनी की कार्यक्षमता को नुकसान पहुंचा सकता है।
किडनी खराब होने के संकेतों को न करें नजरअंदाज
किडनी पर दवाओं के असर के शुरुआती चरण में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। समय के साथ यूरिन करने में परेशानी, लगातार पीठ में दर्द या पैरों और टखनों के आसपास सूजन जैसी समस्याएं दिखाई दे सकती हैं। ऐसे लक्षण नजर आने पर डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। गंभीर मामलों में किडनी की कार्यक्षमता इतनी कम हो सकती है कि मरीज को डायलिसिस की जरूरत पड़ जाए।
कभी-कभार पेनकिलर लेने और आदत बना लेने में फर्क
डॉक्टरों के मुताबिक महीने में कभी-कभार सिरदर्द या शरीर में दर्द होने पर एक-दो बार पेनकिलर लेने से नुकसान का खतरा आमतौर पर कम होता है, लेकिन इसे रोजाना या बार-बार लेने की आदत बनाना खतरनाक हो सकता है। खासकर लंबे समय तक बिना डॉक्टर की निगरानी के दवा लेने से किडनी को नुकसान पहुंचने का जोखिम बढ़ सकता है।
अगर शरीर के किसी हिस्से में लगातार दर्द रहता है तो सिर्फ पेनकिलर खाकर उसे दबाने के बजाय दर्द की असली वजह का पता लगाना जरूरी है। लंबे समय तक दर्द रहने पर डॉक्टर से सलाह लेकर उचित इलाज और जरूरी जांच करानी चाहिए।