देशभर में पैर पसार रहा स्वाइन फ्लू

देशभर में पैर पसार रहा स्वाइन फ्लू

📅 August 25, 2026 🏷️ Health/News ✍️ NewsTime Editorial
देशभर में स्वाइन फ्लू यानी H1N1 के मामले एक बार फिर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। राजधानी दिल्ली समेत कई राज्यों में संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं। कर्नाटक में 4 हजार से ज्यादा मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जबकि दिल्ली में 1700 से अधिक केस सामने आए हैं। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में भी स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ रहे हैं। नोएडा यानी गौतम बुद्ध नगर में मॉनसून सीजन के दौरान H1N1 के 15 मामले दर्ज किए गए हैं। बढ़ते मामलों के बीच यह सवाल भी उठने लगा था कि क्या भारत में स्वाइन फ्लू का कोई नया स्ट्रेन फैल रहा है, लेकिन भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद यानी ICMR ने स्पष्ट किया है कि देश में H1N1 का कोई नया स्ट्रेन नहीं मिला है। अभी जो संक्रमण फैल रहा है, वह पुराने H1N1 वायरस के कारण ही है। ऐसे में सवाल यह है कि जब वायरस का नया स्ट्रेन नहीं आया है तो हर कुछ सालों के अंतराल पर स्वाइन फ्लू के मामले दोबारा क्यों बढ़ने लगते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक इसके पीछे मौसम में बदलाव के साथ-साथ लोगों की इम्यूनिटी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। भारत में स्वाइन फ्लू का पहला मामला मई 2009 में सामने आया था। इसके बाद दिसंबर 2009 से मार्च 2010 के बीच सर्दियों के मौसम में संक्रमण के मामलों में बड़ी बढ़ोतरी देखी गई थी। इसके बाद 2014 और 2015 के दौरान भी देश में स्वाइन फ्लू का बड़ा प्रकोप देखने को मिला और हजारों लोग संक्रमित हुए। साल 2019 में भी H1N1 के मामलों में काफी बढ़ोतरी हुई थी और अब 2026 में एक बार फिर संक्रमण के मामले बढ़ते नजर आ रहे हैं। सफदरजंग अस्पताल के कम्यूनिटी मेडिसिन विभाग के डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ. जुगल किशोर के मुताबिक भारत में हर कुछ वर्षों के बाद स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ने का एक पैटर्न देखा जाता है। इसका मतलब यह नहीं है कि वायरस बीच में खत्म हो जाता है। H1N1 वायरस लोगों के बीच मौजूद रहता है और समय-समय पर संक्रमण के मामले सामने आते रहते हैं। जब किसी वायरस के कारण बड़ी संख्या में लोग संक्रमित होते हैं तो उनके शरीर में उस वायरस के खिलाफ इम्यूनिटी विकसित हो जाती है। यह इम्यूनिटी कुछ समय तक संक्रमण से बचाव करती है और इस दौरान मामलों की संख्या कम रहती है। लेकिन समय बीतने के साथ लोगों में वायरस के खिलाफ बनी इम्यूनिटी धीरे-धीरे कम हो सकती है। इसके बाद वायरस को दोबारा लोगों को संक्रमित करने का मौका मिलता है और मामलों में बढ़ोतरी दिखाई देने लगती है। इसे आसान भाषा में समझें तो अगर किसी इलाके में पहले बड़ी संख्या में लोग H1N1 से संक्रमित हो चुके हैं तो उनमें वायरस के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो सकती है। इससे कुछ वर्षों तक संक्रमण का असर कम रहता है। लेकिन धीरे-धीरे जब लोगों की इम्यूनिटी कमजोर होती है तो वायरस फिर से फैलने लगता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कोई भी वायरस हमेशा के लिए खत्म नहीं होता और इम्यूनिटी का स्तर संक्रमण के फैलाव को प्रभावित कर सकता है। स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों में मौसम की भी अहम भूमिका मानी जा रही है। बारिश, उमस और तापमान में लगातार बदलाव के दौरान फ्लू जैसे संक्रमण तेजी से फैल सकते हैं। इसके अलावा ऑफिस, स्कूल, मेट्रो और अन्य बंद जगहों पर बड़ी संख्या में लोगों का एक-दूसरे के संपर्क में रहना भी संक्रमण फैलने की संभावना बढ़ाता है। संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से निकलने वाले छोटे कणों के जरिए वायरस दूसरे लोगों तक पहुंच सकता है। मामलों में कमी कब आएगी, इसे लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि जब समुदाय में पर्याप्त इम्यूनिटी विकसित हो जाएगी तो संक्रमण के मामले धीरे-धीरे कम हो सकते हैं। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि लोगों को सावधानी छोड़ देनी चाहिए। ज्यादातर मरीजों में हल्के लक्षण देखने को मिलते हैं और वे सामान्य उपचार के साथ ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ लोगों में संक्रमण गंभीर रूप भी ले सकता है। तेज बुखार, शरीर में दर्द, कमजोरी और खांसी जैसे लक्षणों के साथ अगर सांस लेने में परेशानी होने लगे तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि स्वाइन फ्लू को लेकर फिलहाल कोरोना जैसी स्थिति बनने का कोई आधार नहीं है। H1N1 और कोरोना दोनों श्वसन तंत्र को प्रभावित करने वाले वायरस हैं और दोनों में बुखार, खांसी, कमजोरी और शरीर में दर्द जैसे लक्षण हो सकते हैं। गंभीर मामलों में सांस लेने में परेशानी भी हो सकती है। हालांकि वर्तमान स्थिति को देखते हुए घबराने की जरूरत नहीं है। ICMR के अनुसार भारत में H1N1 का कोई नया स्ट्रेन नहीं मिला है और वर्तमान में फैल रहा वायरस वैक्सीन में शामिल स्ट्रेन से अच्छी तरह मेल खाता है। स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकारों ने भी अस्पतालों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड और जरूरी बेड तैयार रखने, आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। एम्स और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र यानी NCDC समेत प्रमुख रेफरल लैब के जरिए सैंपलों की जांच और निगरानी की जा रही है। जिन राज्यों में संक्रमण के मामले बढ़े हैं, वहां स्वास्थ्य विभागों को भी आवश्यक तैयारियां पूरी रखने के लिए कहा गया है। NCR में भी स्वाइन फ्लू के मामलों पर स्वास्थ्य विभाग नजर बनाए हुए है। नोएडा यानी गौतम बुद्ध नगर में इस सीजन में H1N1 के 15 मामले सामने आए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार ज्यादातर मरीजों में सामान्य लक्षण हैं और स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है। गाजियाबाद में 2 और फरीदाबाद में 4 मामले दर्ज किए गए हैं। बढ़ते मामलों को देखते हुए अस्पतालों को फ्लू जैसे लक्षणों के साथ आने वाले मरीजों की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। स्वाइन फ्लू के साथ-साथ देश के कई हिस्सों में डेंगू के मामले भी बढ़ रहे हैं। इस साल देश में अब तक डेंगू के 13,336 मामले दर्ज किए गए हैं। तमिलनाडु, महाराष्ट्र और केरल में सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं। दिल्ली में फिलहाल 244 डेंगू केस दर्ज किए गए हैं, लेकिन लगातार हो रही बारिश के कारण आने वाले दिनों में मामलों में बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में स्वाइन फ्लू और डेंगू दोनों को लेकर स्वास्थ्य विभाग निगरानी बढ़ा रहे हैं। विशेषज्ञों की सलाह है कि फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देने पर लापरवाही न करें, जरूरत पड़ने पर जांच कराएं और डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलाज लें। स्वाइन फ्लू को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी और समय पर चिकित्सा सलाह संक्रमण को गंभीर होने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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