दिल्ली में स्वाइन फ्लू यानी इन्फ्लूएंजा A(H1N1) के बढ़ते मामलों ने चिंता बढ़ा दी है। दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, इस साल अब तक H1N1 के 1777 मामले सामने आ चुके हैं। पिछले 14 दिनों में ही 433 नए केस दर्ज किए गए हैं। 19 अगस्त को 114 नए मामले सामने आए। राजधानी के कई अस्पतालों की ओपीडी में फ्लू जैसे लक्षणों वाले मरीजों की संख्या भी बढ़ी है और कई मरीजों की स्वाइन फ्लू जांच की जा रही है। स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा ने दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने और जरूरत पड़ने पर केंद्र की ओर से हर संभव मदद उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। दिल्ली AIIMS के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. नीरज निश्चल के अनुसार, इन्फ्लूएंजा के फैलने के लिए केवल ठंडा मौसम ही जिम्मेदार नहीं होता। वायरस का सर्कुलेशन, लोगों की बीमारी से बचाव की क्षमता और संक्रमण फैलने के अनुकूल परिस्थितियां एक साथ बनने पर फ्लू के मामले बढ़ सकते हैं। मॉनसून के दौरान बारिश, उमस और बंद कमरों में रहने की वजह से वेंटिलेशन कम होने पर संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ सकता है। H1N1 संक्रमण में अचानक तेज बुखार, सूखी खांसी, शरीर में दर्द, सिरदर्द, गले में खराश, ठंड लगना और थकान जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ गंभीर मरीजों में सांस लेने में परेशानी और ऑक्सीजन का स्तर कम होने की समस्या भी हो सकती है। सांस लेने में दिक्कत, सीने में दर्द, लगातार तेज बुखार, भ्रम की स्थिति, होंठ नीले पड़ना या लक्षण लगातार बिगड़ने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। बुजुर्गों, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं, हार्ट और लंग्स से जुड़ी बीमारी वाले लोगों, डायबिटीज के मरीजों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को गंभीर संक्रमण का ज्यादा खतरा हो सकता है। गंभीर या ज्यादा जोखिम वाले मरीजों में डॉक्टर एंटीवायरल दवा ओसेल्टामिविर की सलाह दे सकते हैं। यह बीमारी की शुरुआत के शुरुआती 48 घंटे में शुरू किए जाने पर सबसे ज्यादा प्रभावी मानी जाती है। H1N1 में एंटीबायोटिक सामान्य तौर पर जरूरी नहीं होती, जब तक बैक्टीरियल इंफेक्शन मौजूद न हो। डॉ. नीरज निश्चल ने यह भी बताया कि बढ़े हुए मामलों का एक कारण ज्यादा टेस्टिंग भी हो सकता है। पहले जिन मरीजों को सामान्य वायरल बुखार या फ्लू मानकर इलाज किया जाता था, अब उनकी H1N1 जांच अधिक संख्या में की जा रही हो सकती है। इसलिए आंकड़ों को समझने के लिए यह देखना भी जरूरी है कि फ्लू की कितनी टेस्टिंग हो रही है। विशेषज्ञों ने लोगों को हाथों की स्वच्छता का ध्यान रखने, खांसते और छींकते समय चेहरे को ढकने, बीमार होने पर घर पर रहने और जरूरत पड़ने पर मास्क का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। फ्लू जैसे लक्षण होने पर खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह ने बताया कि 2026 में अब तक इन्फ्लूएंजा-A के कुल 2392 मामले सामने आए हैं। इनमें H1N1 के 1777, H1 के 37, H3 के 138 और अन्य स्ट्रेन के 440 मामले शामिल हैं। दिल्ली स्टेट हेल्थ मिशन और इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम के जरिए ILI, SARI और इन्फ्लूएंजा के मामलों की लगातार निगरानी की जा रही है। दिल्ली सरकार के अनुसार अस्पतालों में बेड, डॉक्टर, दवाइयों और जरूरी मेडिकल उपकरणों की पर्याप्त व्यवस्था है। सरकार मरीजों की संख्या पर लगातार नजर रख रही है और जरूरत के अनुसार अस्पतालों की सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने भी दिल्ली में फ्लू की निगरानी मजबूत करने और लोगों को संक्रमण से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी है।