मोदी की वजह से भारत-रूस में बढ़ा व्यापार: पुतिन

मोदी की वजह से भारत-रूस में बढ़ा व्यापार: पुतिन

📅 August 25, 2026 🏷️ World/Politics ✍️ NewsTime Editorial
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत और रूस के बीच इस साल बढ़े व्यापार का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर दिए जा रहे व्यक्तिगत ध्यान को दिया है। पुतिन ने सोमवार को मॉस्को में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की और इस दौरान भारत-रूस संबंधों की मजबूती तथा दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक सहयोग पर चर्चा की। बातचीत के दौरान पुतिन ने कहा कि उन्हें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि इस साल भारत और रूस के बीच व्यापार में बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि पिछले साल व्यापार में कुछ गिरावट देखने को मिली थी, लेकिन इस साल स्थिति में सुधार हुआ है। रूसी राष्ट्रपति के मुताबिक, इस बढ़ोतरी के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का महत्वपूर्ण योगदान है, क्योंकि वह भारत-रूस संबंधों के विकास पर व्यक्तिगत रूप से ध्यान दे रहे हैं। पुतिन ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत और रूस के बीच सहयोग केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। दोनों देशों के बीच सरकार, संसद, आर्थिक क्षेत्र, ऊर्जा, विज्ञान, तकनीक और अन्य कई क्षेत्रों में लगातार सहयोग जारी है। जयशंकर के साथ मुलाकात के दौरान पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपनी शुभकामनाएं देने के लिए कहा और जल्द ही उनसे मुलाकात की उम्मीद जताई। रूसी राष्ट्रपति ने संकेत दिया कि दोनों नेताओं की अगली मुलाकात शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO के आगामी शिखर सम्मेलन के दौरान हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के नेताओं के कार्यक्रम को देखते हुए इस साल एक और मुलाकात संभव है। पुतिन ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि तय कार्यक्रम के अनुसार वह जल्द ही प्रधानमंत्री मोदी से SCO के मंच पर मुलाकात करेंगे। इसके अलावा दोनों नेताओं के बीच इस साल एक और बैठक होने की संभावना से भी उन्होंने इनकार नहीं किया। भारत और रूस के बीच बढ़ते व्यापार को लेकर पुतिन ने प्रधानमंत्री मोदी के अलावा विदेश मंत्री एस. जयशंकर और रूस के उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव के प्रयासों की भी सराहना की। डेनिस मंटुरोव भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग में रूसी पक्ष का नेतृत्व करते हैं। यह आयोग दोनों देशों के बीच व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पुतिन ने कहा कि भारत और रूस के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत हुई है और दोनों देश सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। इनमें ऊर्जा और फर्टिलाइजर की सप्लाई प्रमुख मुद्दे हैं। भारत के कृषि क्षेत्र के लिए फर्टिलाइजर की उपलब्धता महत्वपूर्ण है और रूस इस क्षेत्र में भारत की जरूरतों को पूरा करने में अपनी भूमिका बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। पुतिन ने कहा कि रूस भारतीय किसानों और कृषि क्षेत्र की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए फर्टिलाइजर की सप्लाई बढ़ा रहा है और भविष्य में इसे और बढ़ाने के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत-रूस सहयोग का दायरा केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं है। फर्टिलाइजर की सप्लाई भी दोनों देशों के आर्थिक संबंधों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। रूस की ओर से भारत को ऊर्जा और कृषि क्षेत्र से जुड़ी आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने में मदद कर रही है। इसके अलावा दोनों देश परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ा रहे हैं। पुतिन ने कहा कि न्यूक्लियर एनर्जी और हाई-टेक सेक्टर से जुड़े कई मुद्दे भारत और रूस के साझा एजेंडे में शामिल हैं और इन क्षेत्रों में लगातार प्रगति हो रही है। परमाणु ऊर्जा, हाई-टेक, विज्ञान और तकनीक जैसे क्षेत्र भविष्य में भारत-रूस संबंधों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। जयशंकर की मॉस्को यात्रा ऐसे समय हुई है, जब भारत और रूस अपनी पुरानी रणनीतिक साझेदारी को नए क्षेत्रों में विस्तार देने की कोशिश कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच लंबे समय से रक्षा और ऊर्जा के क्षेत्र में मजबूत संबंध रहे हैं, लेकिन अब व्यापार, फर्टिलाइजर, परमाणु ऊर्जा, हाई-टेक और अन्य आर्थिक क्षेत्रों में भी सहयोग को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। पुतिन के बयान से यह भी संकेत मिलता है कि दोनों देश मौजूदा व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करना चाहते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच लगातार होने वाली उच्चस्तरीय बातचीत को भारत-रूस संबंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। दोनों देशों के नेतृत्व के बीच सीधे संवाद से व्यापार और रणनीतिक सहयोग से जुड़े कई मुद्दों को आगे बढ़ाने में मदद मिलती है। आने वाले समय में SCO शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी और पुतिन की संभावित मुलाकात पर भी नजर रहेगी। अगर दोनों नेताओं की बैठक होती है तो इसमें व्यापार, ऊर्जा, फर्टिलाइजर, परमाणु ऊर्जा, हाई-टेक और अन्य द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। कुल मिलाकर पुतिन का ताजा बयान भारत और रूस के बीच मजबूत होते आर्थिक और रणनीतिक संबंधों की ओर संकेत करता है। रूस भारत के साथ व्यापार और सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दे रहा है, वहीं दोनों देशों के बीच ऊर्जा, कृषि, परमाणु ऊर्जा और तकनीकी क्षेत्रों में साझेदारी लगातार विस्तार ले रही है।

Comments (0)

Leave a Comment



Related Articles