US-वेनेजुएला के बीच सबसे बड़ी तेल डील

US-वेनेजुएला के बीच सबसे बड़ी तेल डील

📅 August 30, 2026 🏷️ World/Business ✍️ NewsTime Editorial
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के साथ एक बड़े तेल समझौते का दावा किया है। ट्रंप के मुताबिक, इस समझौते के तहत अमेरिका वेनेजुएला के लगभग 65 अरब बैरल तेल भंडार पर नियंत्रण करेगा। उन्होंने इस डील को दुनिया के इतिहास की सबसे बड़ी तेल डील बताया है।

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इस समझौते की जानकारी साझा करते हुए कहा कि अमेरिका ने वेनेजुएला के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया है। उनके मुताबिक, यह समझौता अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री हेगसेथ और वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज के बीच हुई बातचीत के बाद हुआ। ट्रंप ने इसे दुनिया की सबसे बड़ी तेल डील बताया है।

यह ऐलान ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका और वेनेजुएला के संबंध बेहद तनावपूर्ण रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी कार्रवाई के बाद वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर अमेरिका लाया गया था, जहां उन पर नार्को-टेररिज्म और ड्रग तस्करी से जुड़े संघीय आरोप लगाए जाने की बात कही गई।

अमेरिका में गैस की बढ़ती कीमतों के बीच राष्ट्रपति ट्रंप पर ऊर्जा आपूर्ति को लेकर दबाव भी बढ़ रहा है। इसी दौरान ईरान में लंबे समय से जारी युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी असर डाला है। अमेरिका अपनी रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार क्षमता का इस्तेमाल कर रहा है और रिपोर्ट के अनुसार अगस्त की शुरुआत तक उसके रणनीतिक भंडार में 30 करोड़ बैरल से कम तेल बचा था।

क्या है अमेरिका की रणनीति?

जनवरी में निकोलस मादुरो को सत्ता से हटाने के बाद ट्रंप ने अमेरिकी तेल कंपनियों को वेनेजुएला में वापस भेजने और वहां मौजूद तेल संसाधनों का इस्तेमाल करने की बात कही थी। ट्रंप का आरोप रहा है कि वेनेजुएला ने अतीत में अमेरिकी तेल कंपनियों की संपत्तियों का राष्ट्रीयकरण करके अमेरिका को नुकसान पहुंचाया था।

वेनेजुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल भंडारों में से एक है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, देश के पास जमीन के नीचे करीब 303 अरब बैरल कच्चे तेल के भंडार हैं। यह वैश्विक तेल भंडार का लगभग 17 प्रतिशत हिस्सा माना जाता है।

हालांकि, भारी तेल भंडार होने के बावजूद वेनेजुएला अपनी पूरी उत्पादन क्षमता का इस्तेमाल नहीं कर पाता है। देश में कमजोर बुनियादी ढांचा, आर्थिक समस्याएं और तेल उद्योग से जुड़ी चुनौतियां उत्पादन को प्रभावित करती हैं। इसी वजह से दुनिया के विशाल तेल भंडार वाले देशों में शामिल होने के बावजूद वेनेजुएला वैश्विक तेल उत्पादन में अपेक्षाकृत छोटा योगदान देता है।

अमेरिका की नजर वेनेजुएला के तेल संसाधनों पर लंबे समय से रही है। अगर ट्रंप द्वारा बताई गई डील वास्तव में लागू होती है, तो इसका असर अमेरिका की ऊर्जा नीति, वैश्विक तेल बाजार और वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था पर काफी बड़ा हो सकता है। हालांकि, इस समझौते की वास्तविक शर्तें, अमेरिका के नियंत्रण का स्वरूप और तेल भंडार के इस्तेमाल की प्रक्रिया को लेकर अभी और जानकारी सामने आना बाकी है।

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