3 हजार दिरहम की सैलरी देखकर न जाएं दुबई, भारतीय महिला ने बताया वहां की नौकरी का कड़वा सच

3 हजार दिरहम की सैलरी देखकर न जाएं दुबई, भारतीय महिला ने बताया वहां की नौकरी का कड़वा सच

📅 September 14, 2026 🏷️ Lifestyle/Career ✍️ NewsTime Editorial
दुबई की चमक-दमक देखकर नौकरी के लिए न निकलें
दुबई की ऊंची इमारतें, लग्जरी कारें और शानदार लाइफस्टाइल सोशल मीडिया पर देखकर कई भारतीयों का विदेश जाकर नौकरी करने का सपना बन जाता है. लेकिन दुबई में रहने वाली भारतीय महिला श्रेया शुक्ला ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर उन लोगों को रियलिटी चेक दिया है, जो सिर्फ सैलरी को भारतीय रुपये में बदलकर दुबई जाने का फैसला करते हैं.

3 हजार दिरहम की सैलरी सुनकर न लें फैसला
श्रेया के मुताबिक, अगर किसी को दुबई में 3 हजार दिरहम महीने की नौकरी मिल रही है तो सिर्फ भारतीय रुपये में इसकी कीमत देखकर खुश नहीं होना चाहिए. दुबई में इसी सैलरी से घर का किराया, खाना, आने-जाने का खर्च और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करनी होती हैं. उनका कहना है कि उन्होंने ऐसे लोगों को देखा है जिनकी कमाई 2 से 3 हजार दिरहम के बीच है और महीने के अंत तक उनके पास बहुत कम पैसा बचता है.

5 से 6 हजार दिरहम की सैलरी पर विचार करने की सलाह
श्रेया ने सलाह दी कि अगर कोई कंपनी दुबई में नौकरी के लिए बुला रही है तो करीब 5 से 6 हजार दिरहम की मासिक सैलरी मिलने पर ही जाने के बारे में सोचना चाहिए. हालांकि हर व्यक्ति के लिए यह रकम पर्याप्त हो, ऐसा जरूरी नहीं है. खर्च आपकी रहने की जगह, लाइफस्टाइल और कंपनी की ओर से मिलने वाली सुविधाओं पर भी निर्भर करता है.

सोशल मीडिया पर 8 से 10 हजार दिरहम की भी चर्चा
श्रेया की बात पर सोशल मीडिया यूजर्स की अलग-अलग राय सामने आई. कुछ लोगों ने कहा कि मौजूदा समय में 5 से 6 हजार दिरहम भी पर्याप्त नहीं हैं. वहीं कुछ लोगों के मुताबिक दुबई जाने वाले व्यक्ति के लिए 8 से 10 हजार दिरहम की सैलरी ज्यादा बेहतर हो सकती है. इससे साफ है कि दुबई में नौकरी का फैसला केवल एक तय सैलरी के आधार पर नहीं किया जा सकता.

सैलरी से ज्यादा जरूरी है पूरा जॉब पैकेज
विदेश में नौकरी का ऑफर मिलने पर केवल वेतन देखना सही नहीं है. यह भी देखना चाहिए कि कंपनी रहने के लिए घर दे रही है या नहीं, ट्रांसपोर्ट की सुविधा मिल रही है या नहीं, मेडिकल सुविधा और वीजा का खर्च कौन उठाएगा. कई बार कम सैलरी वाला ऐसा पैकेज ज्यादा फायदेमंद हो सकता है जिसमें रहने और आने-जाने की सुविधा कंपनी देती हो.

4 हजार दिरहम बनाम 5 हजार दिरहम का उदाहरण
मान लीजिए किसी कंपनी ने 4 हजार दिरहम की सैलरी के साथ रहने की जगह और ट्रांसपोर्ट की सुविधा दी है. दूसरी कंपनी 5 हजार दिरहम दे रही है, लेकिन किराया, खाना और आने-जाने का पूरा खर्च कर्मचारी को खुद उठाना है. ऐसी स्थिति में 4 हजार दिरहम वाला ऑफर आर्थिक रूप से ज्यादा बेहतर साबित हो सकता है.

भारतीय रुपये में बदलकर न देखें सैलरी
विदेश में नौकरी का ऑफर मिलने के बाद लोग अक्सर सबसे पहले वहां की करेंसी को भारतीय रुपये में बदलते हैं. रकम बड़ी दिखाई देती है और लगता है कि विदेश जाकर अच्छी बचत हो जाएगी. लेकिन असली सवाल यह है कि उस देश में महीने का खर्च कितना है. अगर कमाई का बड़ा हिस्सा किराए, खाने और ट्रांसपोर्ट में चला गया तो ज्यादा दिखाई देने वाली सैलरी का फायदा काफी कम हो सकता है.

दुबई की सोशल मीडिया वाली तस्वीर पूरी कहानी नहीं
सोशल मीडिया पर दुबई की शानदार तस्वीरें देखकर वहां की जिंदगी आसान लग सकती है. लेकिन चमक-दमक के पीछे रहने का खर्च भी काफी महत्वपूर्ण है. इसलिए दुबई या किसी दूसरे देश में नौकरी के लिए जाने से पहले सैलरी के साथ किराया, खाना, ट्रांसपोर्ट, मेडिकल, वीजा और कंपनी की दूसरी सुविधाओं का पूरा हिसाब लगाना जरूरी है.

विदेश जाने से पहले करें पूरा कैलकुलेशन
नौकरी का ऑफर स्वीकार करने से पहले यह जरूर देखें कि महीने की कुल कमाई कितनी होगी, अनिवार्य खर्च कितना होगा और सभी खर्च निकालने के बाद कितनी रकम बच पाएगी. इसी हिसाब से फैसला करना विदेश में नौकरी के लिए जाने वाले भारतीयों के लिए ज्यादा समझदारी भरा कदम हो सकता है.

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