70 हजार की सरकारी बैंक नौकरी छोड़ी, 2 लाख रुपये भरा बॉन्ड... अब 35 हजार की सैलरी से कर रहीं शुरुआत
दो साल की तैयारी के बाद मिली थी नौकरी
मधुरिमा ने मास्टर्स की पढ़ाई पूरी करने के बाद करीब दो साल तक IBPS परीक्षा की तैयारी की थी। अक्टूबर 2022 में उनका चयन एक सरकारी बैंक में हुआ और उन्हें ग्रामीण कर्नाटक की एक ब्रांच में पोस्टिंग मिली। शुरुआत में उन्हें करीब 70 हजार रुपये इन-हैंड सैलरी मिलती थी। इसके अलावा हाउस रेंट अलाउंस भी मिलता था। आर्थिक रूप से यह नौकरी अच्छी थी, लेकिन धीरे-धीरे काम का दबाव उनके लिए परेशानी बनने लगा।
शादी के बाद भी नहीं मिला पर्याप्त समय
मधुरिमा की शादी दिसंबर 2022 में हुई थी। उस समय वह ट्रेनिंग में थीं। उनके मुताबिक, शादी के कुछ ही दिनों बाद उन्हें दोबारा ट्रेनिंग के लिए लौटना पड़ा। इस वजह से वह अपने पति और ससुराल वालों के साथ ज्यादा समय नहीं बिता सकीं। बाद में भी बैंक में छुट्टी लेने को लेकर उन्हें कई बार मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
सुबह 8:30 से रात 10:30 बजे तक काम का दावा
मधुरिमा ने बताया कि उनकी नौकरी सामान्य 9 से 5 बजे वाली नहीं थी। कई बार उनका दिन सुबह 8:30 बजे शुरू होता और रात 10:30 बजे के बाद तक काम चलता था। शाम 7 बजे तक काम करना भी उनके लिए आम बात थी। उनके मुताबिक, कई बार रविवार को भी काम करना पड़ता था। कैशियर की जिम्मेदारी के साथ नए ग्राहक जोड़ने और बैंक के दूसरे टारगेट पूरे करने का दबाव भी रहता था।
कैश काउंटर पर घंटों नहीं मिलता था ब्रेक
मधुरिमा के अनुसार, कैशियर के तौर पर उन्हें सुबह करीब 10 बजे से दोपहर 3:30 बजे तक लगातार काउंटर पर बैठना पड़ता था। कई बार इस दौरान वॉशरूम जाने तक का समय नहीं मिलता था। उन्होंने दावा किया कि लगातार ब्रेक न मिलने और अपनी जरूरतों का ध्यान नहीं रख पाने के कारण उन्हें गंभीर यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन यानी UTI हुआ। उनके मुताबिक, यह परेशानी करीब दो से तीन महीने तक रही और इस दौरान ब्लीडिंग भी हुई। तबीयत खराब होने के बावजूद उनके लिए छुट्टी लेना आसान नहीं था।
ऑफिस के बाद भी पूरे करने पड़ते थे टारगेट
मधुरिमा ने बताया कि ब्रांच के अंदर कैशियर का काम पूरा होने के बाद भी उनकी जिम्मेदारियां खत्म नहीं होती थीं। उन्हें ग्रामीण इलाकों में जाकर नए ग्राहकों से संपर्क करना और बैंक में नए खाते खुलवाने जैसे काम भी करने पड़ते थे। उनकी पोस्टिंग जिस इलाके में थी, वहां वह कन्नड़ भाषा नहीं बोल पाती थीं। ऐसे में स्थानीय लोगों से बातचीत करना उनके लिए चुनौती बन जाता था। उन्होंने यह भी कहा कि एक महिला होने के नाते शाम के समय अकेले गांवों में जाकर ग्राहकों से संपर्क करना उन्हें असुरक्षित महसूस कराता था।
'मैं रोज ऑफिस के बाद रोती थी'
लगातार काम और दबाव का असर मधुरिमा की निजी जिंदगी पर भी पड़ा। उन्होंने बताया कि ऑफिस से घर लौटने के बाद वह रोज रोती थीं। काम की थकान इतनी ज्यादा होती थी कि वह अपने माता-पिता से भी ठीक से बात नहीं कर पाती थीं। उनके माता-पिता उनसे मिलने आए, लेकिन तब भी वह उनके साथ ज्यादा समय नहीं बिता सकीं।
सीनियर कर्मचारी पर लगाया वर्बल एब्यूज का आरोप
मधुरिमा ने एक सीनियर कर्मचारी पर कथित तौर पर वर्बल एब्यूज करने का आरोप भी लगाया। उनके मुताबिक, उस कर्मचारी ने बैंक में महिलाओं के काम करने को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। मधुरिमा ने इस मामले की शिकायत HR से की। उनके अनुसार, शिकायत के बाद संबंधित सीनियर को बुलाया गया और उसके व्यवहार में बदलाव आया।
दोस्त की शादी में छुट्टी नहीं मिली
करीब दो साल तक काम करने के बाद फरवरी 2024 में एक घटना ने मधुरिमा को नौकरी छोड़ने के बारे में गंभीरता से सोचने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने बताया कि दोस्त की शादी में शामिल होने के लिए करीब तीन महीने पहले छुट्टी का आवेदन किया था। लेकिन शादी से सिर्फ तीन दिन पहले उन्हें बताया गया कि बैंक में ऑडिट चल रहा है और वह छुट्टी नहीं ले सकतीं। इसके बाद उन्होंने मार्च 2024 में इस्तीफा देने का फैसला किया।
नौकरी छोड़ने के लिए चुकानी पड़ी 2 लाख की पेनल्टी
मधुरिमा उस समय प्रोबेशन पर थीं। इसलिए इस्तीफा देने से पहले उन्हें एक महीने का नोटिस पीरियड पूरा करना पड़ा। नौकरी छोड़ने के लिए उनके मुताबिक, उन्हें 2 लाख रुपये की बॉन्ड पेनल्टी भी चुकानी पड़ी। जिस सरकारी नौकरी को पाने के लिए उन्होंने दो साल तक मेहनत की थी, उसे छोड़ने के फैसले के साथ उन्हें आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा।
70 हजार से 35 हजार रुपये की सैलरी पर नई शुरुआत
सरकारी बैंक की नौकरी छोड़ने के बाद मधुरिमा ने नई नौकरी तलाशनी शुरू की। इसके बाद उन्होंने करीब 35 हजार रुपये महीने की सैलरी वाली प्राइवेट नौकरी से दोबारा शुरुआत की। यानी उनकी मासिक इन-हैंड कमाई में काफी कमी आई, लेकिन उन्होंने अपने लिए एक अलग रास्ता चुना।
हर किसी के लिए अलग हो सकता है नौकरी का अनुभव
मधुरिमा की कहानी को सरकारी नौकरी या प्राइवेट नौकरी के बीच किसी एक को बेहतर बताने के तौर पर नहीं देखना चाहिए। हर व्यक्ति के लिए नौकरी की प्राथमिकताएं अलग होती हैं। किसी के लिए अच्छी सैलरी और नौकरी की सुरक्षा महत्वपूर्ण होती है, तो किसी के लिए काम के घंटे, छुट्टियां, कार्यस्थल का माहौल और निजी जिंदगी के लिए समय ज्यादा मायने रखता है। मधुरिमा ने अपने अनुभवों के आधार पर सरकारी बैंक की नौकरी छोड़ने का फैसला किया।