नई झील ओवरफ्लो, नेपाल में नया संकट

नई झील ओवरफ्लो, नेपाल में नया संकट

📅 August 29, 2026 🏷️ World/Nepal ✍️ NewsTime Editorial
नेपाल में बुधवार को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद अब एक और बड़ा खतरा सामने आ गया है। नेपाल-चीन सीमा के पास ग्लेशियर टूटने के बाद बनी एक नई झील अब ओवरफ्लो होने लगी है। चीन की सरकारी मीडिया CCTV के मुताबिक, झील का पानी किनारों से बाहर निकलने लगा है और आसपास की नदियों का जलस्तर भी बढ़ रहा है। ऐसे में पहले से बाढ़ की मार झेल रहे नेपाल के कई इलाकों में दोबारा भारी तबाही का खतरा पैदा हो गया है।

इस झील को लेकर नेपाल और चीन की ओर से पहले ही अलर्ट जारी किया गया था। आशंका है कि अगर झील की प्राकृतिक रोक टूटती है, तो बड़ी मात्रा में पानी और मलबा अचानक नीचे की ओर आ सकता है। इससे बाढ़ प्रभावित इलाकों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।

शुक्रवार तक झील में करीब 25 लाख क्यूबिक मीटर पानी जमा होने का अनुमान लगाया गया। इससे एक दिन पहले इसमें लगभग 15 से 20 लाख क्यूबिक मीटर पानी होने की बात सामने आई थी। लगातार पानी बढ़ने के कारण झील ओवरफ्लो होने लगी और इसका पानी ल्हेंदे होते हुए त्रिशूली नदी की ओर बढ़ने लगा।

हालात को देखते हुए नेपाल में रेस्क्यू टीमों को सतर्क कर दिया गया और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई। रसुवा पुलिस ने मगलिंग तक के लोगों से फिलहाल नदी और जोखिम वाले इलाकों से दूर सुरक्षित जगहों पर रहने की अपील की। बढ़ते खतरे के कारण कुछ घंटों के लिए राहत और बचाव अभियान भी रोकना पड़ा, हालांकि बाद में रेस्क्यू ऑपरेशन दोबारा शुरू कर दिया गया।

इस प्राकृतिक आपदा में मरने वालों की संख्या 587 से ज्यादा हो चुकी है, जबकि 1,924 से अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर के मुताबिक, नेपाल में करीब 320 भारतीय नागरिकों से अब तक संपर्क नहीं हो पाया है। भारत सरकार नेपाल के अधिकारियों के लगातार संपर्क में है और भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि चीन की तरफ करीब 400 भारतीय नागरिक फंसे हुए हैं। हालांकि ये सभी सुरक्षित बताए जा रहे हैं। बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास भी उनके संपर्क में है और उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

इस आपदा का असर बड़ी संख्या में आम लोगों पर पड़ा है। रेड क्रॉस के एक अधिकारी के मुताबिक, कम से कम 93 हजार लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं और उन्हें तत्काल राहत की जरूरत है। रेड क्रॉस ने संभावित दूसरी बाढ़ को लेकर भी चिंता जताई है और लोगों से बेहद सतर्क रहने की अपील की है।

यूनिसेफ के अनुसार, फ्लैश फ्लड से करीब 17 हजार बच्चे प्रभावित हुए हैं। बाढ़ में घरों के साथ स्कूल और सड़कें भी क्षतिग्रस्त या बह गई हैं। करीब 10 हजार बच्चों को अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए तत्काल सहायता की जरूरत बताई गई है।

चीन ने नेपाल में आई भीषण बाढ़ के पीछे ऊंचाई वाले क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने को मुख्य वजह बताया है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान के मुताबिक, चीन और नेपाल के विशेषज्ञों के शुरुआती आकलन में ग्लेशियर टूटने की जानकारी सामने आई है। माना जा रहा है कि ग्लेशियर से बर्फ और चट्टानों का मलबा ल्हेंडे नदी में गिरा, जिससे नदी का पानी कुछ समय के लिए रुक गया और एक प्राकृतिक बांध बन गया। बाद में यह प्राकृतिक बांध टूट गया और पानी तेज रफ्तार से नीचे की ओर बहते हुए भोटेकोशी नदी में पहुंचा। इसके कारण नेपाल के कई इलाकों में अचानक फ्लैश फ्लड आई और भारी नुकसान हुआ।

इस घटना के बाद नेपाल और चीन के बीच मौसम संबंधी चेतावनियों और सूचना साझा करने की व्यवस्था पर भी सवाल उठे हैं। नेपाल की ओर से कहा गया था कि दोनों देशों के बीच मौसम संबंधी जानकारी साझा करने की व्यवस्था होने के बावजूद इस घटना से पहले उसे कोई स्पष्ट चेतावनी नहीं मिली थी। हालांकि, नेपाल स्थित चीनी दूतावास ने सोशल मीडिया पर वायरल उन दावों का खंडन किया, जिनमें कहा गया था कि चीन ने हादसे से पहले नेपाल को चेतावनी नहीं दी और इसी वजह से इतनी बड़ी तबाही हुई। दूतावास ने इन दावों को गलत बताया।

इस बीच नेपाल में बाढ़ के बाद एक भारतीय कारोबारी अधिकारी के लापता होने की खबर भी सामने आई है। Infosys Public Services के CEO लक्ष गोपिसेट्टी नेपाल में निजी यात्रा पर गए थे और फिलहाल संपर्क से बाहर हैं। Infosys के मुताबिक, कंपनी उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संबंधित एजेंसियों के संपर्क में है।

लक्ष गोपिसेट्टी सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं को रणनीति, तकनीक, संचालन और डिजिटल बदलाव से जुड़े मामलों में सलाह देते हैं। वह Infosys Public Services की रणनीति और उसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी भी संभालते हैं।

नेपाल में पहले ही भारी तबाही हो चुकी है और अब नई झील के ओवरफ्लो होने से खतरा और बढ़ गया है। प्रशासन और बचाव एजेंसियां हालात पर लगातार नजर रख रही हैं। आने वाले समय में झील का जलस्तर और प्राकृतिक बांध की स्थिति इस बात के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगी कि निचले इलाकों में खतरा कितना बढ़ता है।

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