290 भारतीयों समेत 1500 लापता

290 भारतीयों समेत 1500 लापता

📅 August 28, 2026 🏷️ World/Nepal ✍️ NewsTime Editorial
तिब्बत में भोटेकोशी नदी के पास लैंडस्लाइड और फ्लैश फ्लड के बाद हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। इस आपदा में अब तक 392 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि करीब 1500 लोग लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में 290 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। इसी बीच भोटेकोशी नदी के उद्गम स्थल के पास एक नई झील बनने से नदी के निचले इलाकों में एक बार फिर बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। चीनी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि पानी का दबाव बढ़ने पर यह झील टूट सकती है।

सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि उस इलाके में फिर से पानी जमा होकर एक झील बन गई है। यह वही क्षेत्र है जहां 26 अगस्त को लैंडस्लाइड और फ्लैश फ्लड की घटना हुई थी। हिमालयी इलाकों से आने वाला पानी लगातार इस झील में जमा हो रहा है और इसका आकार बढ़ता जा रहा है। इसके संभावित टूटने से निचले इलाकों में अचानक बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।

स्थिति को देखते हुए लोगों, यात्रियों और राहत-बचाव कार्यों में जुटे कर्मियों को भोटेकोशी नदी के किनारे और दूसरे जोखिम वाले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी गई है। नेपाल के हाइड्रोलॉजी एंड मौसम विज्ञान विभाग यानी DHM को चीनी पक्ष से सीमा के पास नदी के अवरुद्ध होने वाली जगह पर झील बनने की जानकारी मिली है।

चीनी अधिकारियों के अनुमान के मुताबिक, गुरुवार सुबह तक इस झील में करीब 20 लाख क्यूबिक मीटर पानी जमा हो चुका था। अगले तीन दिनों में इसमें करीब 30 लाख क्यूबिक मीटर अतिरिक्त पानी जमा होने की आशंका जताई गई है। पानी की मात्रा बढ़ने के साथ झील के टूटने का खतरा भी बढ़ सकता है।

**बाढ़ के बीच 290 भारतीयों से संपर्क टूटा**

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने गुरुवार को बताया कि 290 भारतीय नागरिकों से अब तक संपर्क नहीं हो पाया है। इनमें अलग-अलग समूहों के लोग शामिल हैं। पहला समूह त्रिशूली-1 पावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले 73 भारतीयों का है। इसके अलावा तमिलनाडु के दो अलग-अलग समूहों में 37 और 49 लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे। इनमें से 21 लोगों को दोपहर करीब एक बजे सुरक्षित निकाल लिया गया।

पश्चिम बंगाल के 32 लोग नेपाल के रसुवा जिले के तिमुरे में मौजूद थे। इसके अलावा अलग-अलग राज्यों के 61 भारतीयों का एक समूह और केरल के 33 लोग भी संपर्क से बाहर बताए गए हैं। भारतीय अधिकारियों की ओर से प्रभावित लोगों तक पहुंचने और उनकी स्थिति का पता लगाने के प्रयास जारी हैं।

**नेपाल के लिए भारत ने भेजी 47.5 टन राहत सामग्री**

भारत ने नेपाल में आई इस प्राकृतिक आपदा के बाद राहत और बचाव के लिए मदद बढ़ाई है। भारत की ओर से अब तक कुल 47.5 टन राहत सामग्री भेजी जा चुकी है। राहत सामग्री पहुंचाने के लिए भारतीय वायुसेना के C-130J और C-17 विमानों का इस्तेमाल किया गया है।

भारत आगे राहत सामग्री की एक और खेप भेजने पर भी विचार कर रहा है। इसमें बेली ब्रिज भी शामिल हो सकते हैं। बाढ़ और भूस्खलन के कारण जिन इलाकों का सड़क संपर्क टूट गया है, वहां बेली ब्रिज के जरिए अस्थायी संपर्क मार्ग तैयार करने में मदद मिल सकती है।

**150 चीनी नागरिक भी लापता**

नेपाल में आई बाढ़ और भूस्खलन से सिर्फ भारतीय ही प्रभावित नहीं हुए हैं। चीन के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि प्रभावित इलाके में करीब 150 चीनी नागरिक भी लापता हैं। बीजिंग में आयोजित नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने बताया कि लापता चीनी नागरिकों में पर्यटक, तीर्थयात्री और अन्य लोग शामिल हैं।

चीन नेपाल के साथ लगातार संपर्क में है और खोज एवं बचाव अभियान में सहयोग कर रहा है। संबंधित दूतावासों को भी स्थिति की जानकारी दी जा रही है। हालांकि, विदेश मंत्रालय ने कहा कि लापता विदेशी नागरिकों की राष्ट्रीयता से जुड़ी विस्तृत जानकारी की अभी पुष्टि की जा रही है।

भोटेकोशी नदी के पास बनी नई झील ने आपदा के बाद एक और खतरा पैदा कर दिया है। ऐसे में नेपाल और चीन के अधिकारी संभावित बाढ़ की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। वहीं भारत भी अपने नागरिकों की जानकारी जुटाने और नेपाल को राहत सामग्री उपलब्ध कराने के प्रयासों में जुटा है।

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