नेपाल में अब तक 676 मौतें, झील फटने का खतरा टला

नेपाल में अब तक 676 मौतें, झील फटने का खतरा टला

📅 August 30, 2026 🏷️ World/Disaster ✍️ NewsTime Editorial
नेपाल में भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद हालात अभी भी गंभीर बने हुए हैं। अब तक 676 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2,362 लोग लापता बताए जा रहे हैं। भारत के 275 नागरिकों से भी अभी तक संपर्क नहीं हो पाया है। हालांकि, चीन के अधिकारियों के मुताबिक, ग्लेशियर टूटने के बाद बनी सीमा-पार झील में पानी धीरे-धीरे कम हो रहा है और इसके अचानक फटने का खतरा फिलहाल काफी कम हुआ है।

रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार सुबह तक इस झील का क्षेत्रफल करीब 99,000 वर्ग मीटर रह गया था। यह गुरुवार के मुकाबले लगभग 21,000 वर्ग मीटर कम है। झील का कुछ हिस्सा सूखने लगा है और उसका तल भी दिखाई देने लगा है। पानी के धीरे-धीरे निकलने से नेपाल में चल रहे राहत और बचाव अभियान को बड़ी राहत मिली है।

हालांकि, खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। ग्लेशियर टूटने वाली जगह के नीचे एक दूसरी और ज्यादा बड़ी झील भी मिली है। फिलहाल इसकी गहराई का पता नहीं चल पाया है। चीन के अधिकारी ड्रोन और रडार की मदद से इलाके की 24 घंटे निगरानी कर रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर पानी का बहाव कम बना रहता है और अगले दो-तीन दिनों में झील खाली हो जाती है, तो नीचे चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन को सुरक्षित तरीके से जारी रखा जा सकता है।

नेपाल में बाढ़ के दौरान बहकर आए एक बैंक के सेफ को तोड़कर रकम निकालने के आरोप में 29 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह मामला धादिंग जिले में त्रिशूली नदी के इलाके का है। पुलिस के मुताबिक, बाढ़ के दौरान एक बैंक का सेफ पानी के तेज बहाव में बहकर आया था। आरोपियों ने कथित तौर पर उसे तोड़कर उसमें रखी रकम निकाल ली। संयुक्त कार्रवाई में पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 92 लाख 68 हजार 505 नेपाली रुपये नकद बरामद किए हैं। अधिकारियों ने कहा कि आपदा के दौरान मिली संपत्ति या रकम को कानूनी प्रक्रिया के बिना अपने पास रखना अपराध है।

नेपाल की बाढ़ का असर भारत के उत्तर प्रदेश तक भी पहुंच गया है। नारायणी नदी के तेज बहाव के साथ शव बहकर महराजगंज जिले तक पहुंचे हैं। अब तक चार शव बरामद किए जा चुके हैं, जिनमें तीन बच्चों के शव शामिल हैं। महराजगंज प्रशासन ने इस बारे में नेपाल प्रशासन को जानकारी दी है। शवों की पहचान में मदद के लिए तस्वीरें और वीडियो भी नेपाल के अधिकारियों के साथ साझा किए गए हैं।

चितवन जिले में बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में अज्ञात शव मिलने से प्रशासन के सामने गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है। नदी से अब तक 233 शव बरामद किए गए हैं, लेकिन इनमें से सिर्फ चार की पहचान हो सकी है। बाकी 229 अज्ञात शवों को देवघाट में सामूहिक रूप से दफनाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। प्रशासन ने यह फैसला डॉक्टरों की सलाह के बाद लिया, क्योंकि शव तेजी से खराब हो रहे थे और संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया था।

नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले के मुताबिक, इस सप्ताह आई भीषण बाढ़ से हुए नुकसान के बाद देश के पुनर्निर्माण में करीब 4 से 5 अरब डॉलर तक खर्च हो सकता है। उन्होंने इसे शुरुआती अनुमान बताया है। नुकसान और क्षति का विस्तृत आकलन अभी जारी है। सरकार के सामने अब बुनियादी ढांचे, सड़कों, मकानों और अन्य प्रभावित क्षेत्रों को दोबारा खड़ा करने की बड़ी चुनौती है।

इस बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौट रहे 77 तीर्थयात्रियों के लापता होने की खबर ने चिंता बढ़ा दी है। ये श्रद्धालु सद्गुरु के ईशा फाउंडेशन से जुड़े समूह का हिस्सा हैं। पिछले दो दिनों से इन लोगों से संपर्क नहीं हो पाया है। समूह में 19 देशों के नागरिक शामिल हैं।

बताया गया है कि यात्रा से लौटते समय समूह चीन के ग्यिरोंग इलाके में था। इसी दौरान अचानक आई फ्लैश फ्लड ने इलाके को अपनी चपेट में ले लिया। समूह ग्यिरोंग के इमिग्रेशन ऑफिस में मौजूद था, जहां बाढ़ का पानी घुस गया। इस घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और कई लोग संपर्क से बाहर हो गए।

लापता श्रद्धालुओं में अमेरिका के 22, कनाडा के 12, ऑस्ट्रेलिया के 11 और ब्रिटेन के 9 नागरिक शामिल हैं। इसके अलावा जर्मनी के 4, फ्रांस और नेपाल के 3-3 नागरिक हैं। नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, सिंगापुर और स्पेन के 2-2 यात्री भी इस समूह में शामिल हैं। फिनलैंड, हंगरी, इजरायल, लिथुआनिया, फिलीपींस, पुर्तगाल, रूस और दक्षिण अफ्रीका से एक-एक श्रद्धालु के शामिल होने की जानकारी है।

सद्गुरु ने भी अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर इस घटना की जानकारी साझा की है। राहत और बचाव एजेंसियां प्रभावित इलाकों में लोगों की तलाश और बचाव कार्य में जुटी हैं। नेपाल में बाढ़ से हुई व्यापक तबाही के बीच अब प्रशासन की प्राथमिकता लापता लोगों का पता लगाना, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना और संभावित दूसरी आपदा को रोकना है।

ग्लेशियर झील का जलस्तर घटने से तत्काल बड़ा खतरा जरूर कम हुआ है, लेकिन दूसरी झील और लगातार बदलते मौसम के कारण अधिकारियों की निगरानी जारी है। नेपाल के लिए आने वाले कुछ दिन राहत, बचाव और पुनर्निर्माण की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।

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